वित्त मंत्रालय ने ₹1 लाख करोड़ के ‘आर्थिक स्थिरीकरण कोष’ के लिए संसदीय मंजूरी मांगी
भारतीय अर्थव्यवस्था को वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता, विशेष रूप से पश्चिम एशिया (West Asia) में चल रहे संघर्ष से बचाने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने ‘आर्थिक स्थिरीकरण कोष’ (Economic Stabilisation Fund) स्थापित करने हेतु संसदीय मंज़ूरी मांगी।
आर्थिक स्थिरीकरण कोष: सरकार ने ₹1 लाख करोड़ का एक विशेष कोष बनाने का प्रस्ताव रखा है। इसका मुख्य उद्देश्य पश्चिम एशिया और खाड़ी क्षेत्र में युद्ध के कारण उत्पन्न होने वाली अत्यधिक अस्थिरता (Extreme Volatility) के प्रभाव को कम करना है।
- फंडिंग का स्रोत:
- नकद निकासी (Fresh Cash Outgo): 50% से अधिक राशि नई नकदी के रूप में आएगी।
- बचत (Savings): शेष राशि विभिन्न मंत्रालयों की मौजूदा बचतों से पूरी की जाएगी।
अनुपूरक अनुदान मांगें: सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए ₹2.81 लाख करोड़ से अधिक के अतिरिक्त सकल व्यय (Gross Additional Expenditure) के लिए संसद की मंजूरी मांगी है।
| विवरण | राशि (करोड़ में) | स्रोत/प्रकृति |
| कुल अतिरिक्त व्यय | ₹2,81,000+ | कुल प्रस्तावित खर्च |
| शुद्ध नकद निकासी | ₹2,00,000+ | सरकार द्वारा किया जाने वाला वास्तविक नया खर्च |
| बचत/प्राप्तियां | ₹80,000+ | मंत्रालयों की बचत या बढ़ी हुई वसूली से समायोजित |
इस कदम का महत्व
- ऊर्जा सुरक्षा: चूंकि भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है, यह फंड कीमतों में अचानक उछाल आने पर सब्सिडी या अन्य माध्यमों से अर्थव्यवस्था को सहारा देगा।
- बाजार का विश्वास: इस तरह के ‘बफर फंड’ की घोषणा से निवेशकों और बाजारों को यह संकेत मिलता है कि सरकार बाहरी झटकों (External Shocks) से निपटने के लिए तैयार है।
- राजकोषीय अनुशासन: ₹80,000 करोड़ की राशि को बचत से पूरा करना यह दर्शाता है कि सरकार अपने खर्चों को संतुलित करने की कोशिश कर रही है।


