GPS जैमिंग और GPS स्पूफिंग
पश्चिम एशिया के युद्ध में, अमेरिका-इज़राइल और ईरान के नेविगेशन सिस्टम पूरी तरह से गड़बड़ा गए हैं, जिससे जहाजों की लोकेशन गलत तरीके से हवाई अड्डों, जमीन पर या परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में दिखाई दे रही है। यह इलेक्ट्रॉनिक हस्तक्षेप (Electronic Interference) जैसे कि GPS स्पूफिंग या जैमिंग के माध्यम से संभव हुआ है।
जहाज और विमान दोनों ही स्थिति, नेविगेशन और समय (PNT – Position, Navigation, and Timing) की जानकारी के लिए ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) पर निर्भर रहते हैं। इनमें से अमेरिकी ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS) सबसे लोकप्रिय GNSS है।
प्रमुख वैश्विक नेविगेशन प्रणालियाँ (GNSS)
- GPS: संयुक्त राज्य अमेरिका
- Galileo: यूरोप
- GLONASS: रूस
- BeiDou: चीन
- NavIC: भारत
GPS जैमिंग बनाम GPS स्पूफिंग (अंतर)
हालांकि इन दोनों का उपयोग अक्सर समान अर्थों में किया जाता है, लेकिन तकनीकी रूप से ये दो अलग-अलग प्रकार के साइबर हमले हैं:
| विशेषता | GPS जैमिंग (Jamming) | GPS स्पूफिंग (Spoofing) |
| प्रक्रिया | जैमर का उपयोग करके उसी फ्रीक्वेंसी पर ‘शोर’ (noise) पैदा करना। | GPS सिग्नल की नकल करना और गलत डेटा भेजना। |
| प्रभाव | यह असली सिग्नल को इतना कमजोर कर देता है कि नेविगेशन सिस्टम काम करना बंद कर देता है। | यह पायलट या कप्तान को उनके वास्तविक स्थान के बारे में गलत जानकारी देता है। |
| लक्ष्य | सिग्नल को पूरी तरह से ब्लॉक या बाधित करना। | सिस्टम को धोखा देना या गलत रास्ते पर ले जाना। |


