समुद्री तापीय ऊर्जा रूपांतरण (OTEC) परियोजना
केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लक्षद्वीप के कवरत्ती में समुद्री तापीय ऊर्जा रूपांतरण (Ocean Thermal Energy Conversion – OTEC) परियोजना की प्रगति की समीक्षा की। यह तकनीक समुद्र की सतह के गर्म पानी और गहराई के ठंडे पानी के बीच के तापमान के अंतर (Thermal Gradient) का उपयोग करके ऊर्जा उत्पन्न करती है।
यह कैसे काम करता है?
- ऊर्जा का स्रोत: उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में, सूर्य की गर्मी से समुद्र की सतह का पानी गर्म हो जाता है, जबकि गहराई में पानी बहुत ठंडा रहता है।
- बिजली उत्पादन: जब सतह और गहराई के पानी में कम से कम 20°C का अंतर होता है, तो गर्म पानी का उपयोग एक ‘वर्किंग फ्लूइड’ (जैसे अमोनिया या स्वयं समुद्री जल) को वाष्पित करने के लिए किया जाता है।
- टर्बाइन का संचालन: यह वाष्प एक टर्बाइन या जनरेटर को घुमाती है, जिससे बिजली पैदा होती है।
- संघनन (Condensation): इसके बाद, गहराई से पंप किए गए ठंडे पानी का उपयोग करके उस वाष्प को वापस तरल में बदल दिया जाता है।
लक्षद्वीप के लिए इसके लाभ
- स्वच्छ पेयजल: जो प्रणालियाँ समुद्री जल का उपयोग करती हैं, वे संघनन प्रक्रिया के दौरान मीठा पानी (Desalinated Water) भी बनाती हैं।
- अक्षय ऊर्जा: सौर या पवन ऊर्जा के विपरीत, OTEC मौसम पर निर्भर नहीं है और 24/7 निरंतर बिजली प्रदान कर सकता है।
- पर्यावरण अनुकूल: यह डीजल पर निर्भरता को कम करेगा, जिससे परिवहन लागत और कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी।
- भूजल की सुरक्षा: यह खारे होते जा रहे भूजल और वर्षा पर निर्भरता की समस्या का स्थायी समाधान है।
वैश्विक स्तर पर भारत का स्थान
भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल है जो सक्रिय रूप से OTEC सुविधाओं का विकास कर रहे हैं। जापान और संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ, भारत इस भविष्योन्मुखी तकनीक में एक वैश्विक अग्रणी (Global Leader) के रूप में उभर रहा है।
Source: PIB


