सुपरनोवा के बिना सीधे ब्लैक होल में समाना

वैज्ञानिकों ने एक ऐसी दुर्लभ खगोलीय घटना का अब तक का सबसे स्पष्ट दृश्य कैद किया है, जिसमें एक तारा बिना किसी सुपरनोवा (Supernova) विस्फोट के सीधे ब्लैक होल (Black Hole) में समा गया।

आमतौर पर भारी तारों का अंत एक भीषण विस्फोट के साथ होता है, लेकिन इस मामले में तारे ने एक अलग रास्ता चुना। इस खोज का विवरण नीचे दिया गया है:

तारा M31-2014-DS1: जन्म से अंत तक

  • स्थान: यह तारा पृथ्वी से लगभग 25 लाख प्रकाश वर्ष दूर एंड्रोमेडा गैलेक्सी (Andromeda Galaxy) में स्थित था।
  • प्रारंभिक अवस्था: जन्म के समय इसका द्रव्यमान सूर्य से लगभग 13 गुना अधिक था।
  • अंतिम अवस्था: अपनी मृत्यु के समय तक, शक्तिशाली हवाओं के कारण द्रव्यमान खोने के बाद यह सूर्य के द्रव्यमान का लगभग 5 गुना रह गया था। यह एक ‘हाइड्रोजन-रहित सुपरजायंट’ (Hydrogen-depleted supergiant) तारा था।
  • घटना: 2014 में नासा के टेलीस्कोप ने रिकॉर्ड किया कि यह तारा तीन साल तक इन्फ्रारेड रोशनी में चमकता रहा और फिर अचानक गायब हो गया, पीछे सिर्फ धूल का एक घेरा छोड़ गया।

सुपरनोवा बनाम सीधे ब्लैक होल में समाना

सामान्यतः एक विशाल तारा दो तरीकों से समाप्त होता है:

1. पारंपरिक सुपरनोवा विस्फोट

जब सूर्य से कम से कम 5 गुना बड़े तारे का ईंधन खत्म हो जाता है, तो वह ठंडा हो जाता है। दबाव कम होने के कारण गुरुत्वाकर्षण हावी हो जाता है और तारा अचानक ढह जाता है। यह पतन इतनी तेजी से होता है कि एक विशाल शॉक वेव पैदा होती है, जिससे तारे के बाहरी हिस्से में विस्फोट हो जाता है।

2. सीधे ब्लैक होल में समाना

M31-2014-DS1 के मामले में, वैज्ञानिकों ने देखा कि तारा बिना किसी बड़े धमाके के सीधे ब्लैक होल बन गया। यह शोध इस गुत्थी को सुलझाने में मदद करेगा कि कौन से विशिष्ट तारे बिना विस्फोट के ब्लैक होल का रूप लेते हैं।


सुपरनोवा के अन्य प्रकार

शोध में सुपरनोवा के दो मुख्य प्रकारों का भी उल्लेख किया गया है:

प्रकारकारणपरिणाम
टाइप II (Massive Star)विशाल तारे (सूर्य से >5 गुना बड़े) के केंद्र का ईंधन खत्म होना।नेबुला (Nebula) और न्यूट्रॉन स्टार या ब्लैक होल का निर्माण।
टाइप Ia (Binary System)एक व्हाइट ड्वार्फ (White Dwarf) का दूसरे तारे से पदार्थ खींचना या टकराना।व्हाइट ड्वार्फ का पूरी तरह से फट जाना।

ब्लैक होल ब्रह्मांड की सबसे घनी वस्तुएं हैं। हालांकि इनकी थ्योरी 50 साल से भी पुरानी है, लेकिन इस तरह की सीधी ‘मृत्यु’ को कैमरे में कैद करना विज्ञान के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।

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