बार्क स्पाइडर (Bark Spiders)
वैज्ञानिकों ने हाल ही में ‘बार्क स्पाइडर’ (Bark Spiders) का अध्ययन किया है ताकि यह समझा जा सके कि वे इतना मजबूत रेशम (silk) किन परिस्थितियों में बनाते हैं। यह शोध ‘इंटीग्रेटिव जूलॉजी’ (Integrative Zoology) पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।
यहाँ इस शोध की मुख्य बातें आसान भाषा में दी गई हैं:
असाधारण मजबूती: स्टील से भी ताकतवर
- मुख्य प्रजाति: मेडागास्कर के जंगलों में पाई जाने वाली ‘डार्विन बार्क स्पाइडर’ (Caerostris darwini)।
- रिकॉर्ड: यह मकड़ी दुनिया का सबसे बड़ा गोलाकार जाल (orb web) बुनती है।
- ताकत: इसका रेशम लोहे से लगभग 3 गुना अधिक मजबूत होता है। इसकी ‘टेन्साइल स्ट्रेंथ’ (खींचने की क्षमता) 1.6 गीगापास्कल है, जो इसे अब तक का सबसे कठिन जैविक पदार्थ (toughest biological material) बनाती है।
शरीर का आकार और रेशम की गुणवत्ता
- वैज्ञानिकों ने पाया कि शरीर का आकार रेशम की गुणवत्ता को प्रभावित करता है।
- बड़ी मकड़ियाँ = मजबूत रेशम: विकासक्रम (Evolution) के साथ, बड़ी मकड़ियों ने बड़े शिकार पकड़ने के लिए बड़े जाल और मजबूत रेशम के धागे विकसित किए हैं।
ड्रैगलाइन सिल्क (Dragline Silk) का महत्व
यह रेशम मकड़ी के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है क्योंकि:
- यह जाल की मुख्य संरचना (Backbone) बनाता है।
- यह सुरक्षा रेखा (safety lines) और आपातकालीन निकास रस्सी (escape ropes) के रूप में काम करता है।
चुनौती: उच्च ऊर्जा की खपत
इतना मजबूत रेशम बनाना मकड़ी के लिए बहुत मेहनत का काम है:
- मेटाबॉलिक लागत: इस रेशम को बनाने के लिए अमीनो एसिड की आवश्यकता होती है, जिसके संश्लेषण (synthesis) में बहुत ऊर्जा खर्च होती है।
- प्रोलाइन (Proline) की भूमिका: डार्विन बार्क स्पाइडर के रेशम में ‘प्रोलाइन’ नामक प्रोटीन बहुत अधिक मात्रा में होता है। यही इसे लचीला और मजबूत बनाता है, लेकिन इसे बनाना मकड़ी के लिए शरीरिक रूप से बहुत “महंगा” (ज्यादा ऊर्जा खपत वाला) पड़ता है।


