भारत-जर्मनी शिखर सम्मेलन 2026
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर जर्मनी के चांसलर श्री फ्रेडरिक मर्ज़ ने 12-13 जनवरी 2026 को भारत की अपनी पहली आधिकारिक यात्रा की। यह यात्रा न केवल चांसलर मर्ज़ की भारत की पहली यात्रा थी, बल्कि पद संभालने के बाद उनकी पहली एशिया यात्रा भी थी, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की बढ़ती रणनीतिक महत्ता को रेखांकित करती है।
ऐतिहासिक मील के पत्थर का संगम
यह उच्च-स्तरीय दौरा एक अत्यंत महत्वपूर्ण मोड़ पर आयोजित हुआ। दोनों देशों ने जहाँ 2025 में अपनी रणनीतिक साझेदारी के 25 वर्ष पूरे किए, वहीं वर्ष 2026 में राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ मनाई जा रही है। 23 प्रमुख जर्मन CEO के साथ आए चांसलर मर्ज़ का स्वागत प्रधानमंत्री मोदी ने अहमदाबाद में किया, जहाँ दोनों नेताओं ने साबरमती आश्रम में महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी और अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव में हिस्सा लिया।
रक्षा औद्योगिक सहयोग रोडमैप: एक नया अध्याय
यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण परिणाम रक्षा औद्योगिक सहयोग रोडमैप के लिए एक ‘संयुक्त आशय घोषणा’ (JDoI) पर हस्ताक्षर रहा। इसके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- सह-विकास और सह-उत्पादन: दोनों देश अब रक्षा उपकरणों के साझा निर्माण और तकनीक हस्तांतरण पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
- सैन्य सहयोग: सैन्य स्तर पर गहरे संबंधों के लिए ‘Track 1.5’ विदेश नीति और सुरक्षा संवाद की स्थापना की गई।
- संयुक्त अभ्यास: जर्मनी ने फरवरी 2026 में होने वाले नौसैनिक अभ्यास MILAN, IONS कॉन्क्लेव और वायु सेना के अभ्यास TARANG SHAKTI में शामिल होने की पुष्टि की है।
आर्थिक और तकनीकी साझेदारी
बैठक के दौरान रक्षा के अलावा अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर भी सहमति बनी:
- सेमीकंडक्टर और क्रिटिकल मिनरल्स: आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए 19 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए।
- वीजा मुक्त ट्रांजिट: भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए जर्मनी के हवाई अड्डों के माध्यम से वीजा-मुक्त पारगमन (transit) की सुविधा की घोषणा की गई।
- ग्रीन हाइड्रोजन: ऊर्जा सुरक्षा के लिए हरित हाइड्रोजन क्षेत्र में सहयोग को ‘गेम-चेंजर’ बताया गया।


