इसरो का ‘डस्ट एक्सपेरिमेंट’ (DEX)

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने ब्रह्मांड के एक गहरे रहस्य से पर्दा उठाया है। इसरो के पहले स्वदेशी कॉस्मिक डस्ट डिटेक्टर, ‘डस्ट एक्सपेरिमेंट’ (DEX) से प्राप्त आंकड़ों ने पुष्टि की है कि अंतरिक्ष से आने वाले सूक्ष्म कण, जिन्हें ‘इंटरप्लेनेटरी डस्ट पार्टिकल्स’ (IDPs) कहा जाता है, लगभग हर 1000 सेकंड (करीब 16 मिनट) में पृथ्वी के वायुमंडल से टकरा रहे हैं।

क्या हैं ये ‘कॉस्मिक हमलावर’?

ये कण धूमकेतुओं (Comets) और क्षुद्रग्रहों (Asteroids) के टूटने से बने सूक्ष्म अवशेष हैं। जब ये तेज़ गति से हमारे वायुमंडल में प्रवेश करते हैं, तो घर्षण के कारण जल उठते हैं, जिन्हें हम रात के आकाश में ‘टूटते तारे’ (Shooting Stars) के रूप में देखते हैं। ये कण वायुमंडल में एक रहस्यमयी “उल्का परत” (Meteor Layer) का निर्माण करते हैं।


DEX: अंतरिक्ष की ‘आवाज’ सुनने वाला उपकरण

अहमदाबाद स्थित भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (PRL) द्वारा विकसित यह 3-किलोग्राम का उपकरण तकनीक का एक अनूठा उदाहरण है:

  • हाइपरवेलोसिटी सिद्धांत: यह उपकरण कणों को देखने के बजाय उनके टकराव से होने वाली ‘आवाज’ या तरंगों को “सुनने” के लिए ट्यून किया गया है।
  • अत्यधिक कुशल: यह मात्र 4.5 वॉट बिजली (एक छोटे LED बल्ब से भी कम) की खपत पर काम करता है।
  • मिशन विवरण: इसे 1 जनवरी 2024 को PSLV-C58 XPoSat मिशन के साथ लॉन्च किया गया था और यह 350 किमी की ऊंचाई पर सफलतापूर्वक डेटा कैप्चर कर रहा है।

गगनयान और डीप-स्पेस मिशन के लिए क्यों है अहम?

इसरो के अनुसार, यह डेटा केवल वैज्ञानिक शोध तक सीमित नहीं है, बल्कि भविष्य के मिशनों के लिए सुरक्षा कवच की तरह है:

  1. सैटेलाइट सुरक्षा: ये छोटे कण उच्च गति के कारण सैटेलाइट्स और स्पेस टेलीस्कोप को भारी नुकसान पहुँचा सकते हैं। इनकी सटीक मैपिंग से खतरों का आकलन आसान होगा।
  2. मानव मिशन (Gaganyaan): अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित रखने के लिए अंतरिक्ष के वातावरण की सटीक निगरानी अनिवार्य है।
  3. अंतरग्रहीय भविष्य: DEX की सफलता ने शुक्र (Venus), मंगल (Mars) और चंद्रमा के अज्ञात वातावरण में धूल के कणों का अध्ययन करने के लिए एक ‘ब्लूप्रिंट’ तैयार कर दिया है।
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