भारत की राष्ट्रपति ने पनडुब्बी आईएनएस वाघशीर में यात्रा की
सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर और भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने भारतीय नौसेना की ताकत और स्वदेशी तकनीक का प्रत्यक्ष अनुभव करने के लिए एक ऐतिहासिक यात्रा की। राष्ट्रपति ने 28 दिसंबर 2025 को कर्नाटक के कारवार नौसेना बंदरगाह पर स्वदेशी कालवरी श्रेणी की पनडुब्बी आईएनएस वाघशीर (INS Vaghsheer) में सवार होकर समुद्र के भीतर परिचालन क्षमताओं का जायजा लिया।
गहरे समुद्र में दो घंटे का साहसिक भ्रमण
पश्चिमी तट पर हुई इस समुद्री यात्रा के दौरान राष्ट्रपति मुर्मु दो घंटे से अधिक समय तक पनडुब्बी के भीतर रहीं। इस दौरान उन्होंने:
- पनडुब्बी के जटिल परिचालन अभ्यासों (Operational Manoeuvres) को बारीकी से देखा।
- पनडुब्बी के चालक दल (Crew) के साथ बातचीत की और कठिन परिस्थितियों में उनके काम करने के जज्बे की सराहना की।
- सैन्य परिचालन स्थितियों में सशस्त्र बलों के साथ अपनी निरंतर सहभागिता को और मजबूत किया।
INS वाघशीर: ‘मेक इन इंडिया’ की एक बड़ी उपलब्धि
आईएनएस वाघशीर ‘प्रोजेक्ट 75’ के तहत निर्मित कलवरी श्रेणी की छठी और अंतिम पनडुब्बी है। इसकी मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
- निर्माण: इसे मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) द्वारा फ्रांस के नेवल ग्रुप के सहयोग से बनाया गया है।
- नौसेना में शामिल: सफल समुद्री परीक्षणों के बाद इसे 9 जनवरी 2025 को भारतीय नौसेना को सौंपा गया था।
- महत्व: यह राष्ट्रपति की किसी स्वदेशी कलवरी श्रेणी की पनडुब्बी पर पहली यात्रा है, जो भारत की आत्मनिर्भरता को दर्शाती है।
सर्वोच्च कमांडर की सक्रिय भागीदारी
यह यात्रा भारतीय सेनाओं के प्रति राष्ट्रपति की निरंतर प्रतिबद्धता का हिस्सा है। इससे पहले नवंबर 2024 में, उन्होंने स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत पर नौसेना के परिचालन प्रदर्शन का निरीक्षण किया था। वाघशीर पर उनकी मौजूदगी न केवल नौसैनिकों का मनोबल बढ़ाती है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती समुद्री ताकत का संदेश भी देती है।


