लोकसभा ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव खारिज कर दिया
लोकसभा ने 10 मार्च को लगभग 13 घंटे की बहस के बाद ध्वनि मत से अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव को खारिज कर दिया। बहस में भाग लेते हुए केंद्रीय गृह मंत्री ने कहा कि लोकसभा के नियम 374 के तहत, अव्यवस्था या अनुशासनहीनता की स्थिति में, अध्यक्ष के पास सदस्यों को चेतावनी देने, नाम लेने, निष्कासित करने और निलंबित करने का अधिकार है। उन्होंने आगे कहा कि नियम 375 के तहत, गंभीर अव्यवस्था की स्थिति में, सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ती है। उन्होंने यह भी कहा कि नियम 380 के तहत, अध्यक्ष को कार्यवाही से असंसदीय शब्दों और टिप्पणियों को हटाने (expunge) का अधिकार है।
लोक सभा अध्यक्ष को हटाने के संवैधानिक प्रावधान
भारत के संविधान का अनुच्छेद 94(c) प्रावधान करता है कि लोकसभा के अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को सदन के तत्कालीन सदस्यों के बहुमत से पारित प्रस्ताव द्वारा पद से हटाया जा सकता है। इस प्रस्ताव को पेश करने से पहले 14 दिनों का नोटिस अनिवार्य है। संविधान का अनुच्छेद 96 अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को सदन की अध्यक्षता करने से रोकता है जब उनके पद से हटाए जाने का प्रस्ताव विचाराधीन हो।
यदि लोकसभा में प्रस्ताव पर चर्चा होती है, तो अध्यक्ष को सदन में अपना बचाव करने का संवैधानिक अधिकार है। लोकसभा अध्यक्ष को प्रस्ताव के खिलाफ वोट देने का अधिकार है। अध्यक्ष को हटाने का प्रस्ताव लाने के लिए नोटिस पर कम से कम दो लोकसभा सदस्यों के हस्ताक्षर होना आवश्यक है। नोटिस पर कितने भी सदस्य हस्ताक्षर कर सकते हैं, लेकिन न्यूनतम दो अनिवार्य हैं। सदन द्वारा प्रभावी बहुमत (Effective Majority) से प्रस्ताव पारित होने पर अध्यक्ष को पद से हटाया जा सकता है। संविधान के अनुच्छेद 94C में ऐसे कदम के प्रावधान हैं।
पूर्व उदाहरण
अतीत में लोकसभा के चार अध्यक्षों — जी.वी. मावलंकर (1954), हुकम सिंह (1966), बलराम जाखड़ (1987) और ओम बिरला (2026) — ने अविश्वास प्रस्तावों का सामना किया, जो सभी खारिज कर दिए गए।
मुख्य संवैधानिक बिंदु
| विवरण | प्रावधान |
| नोटिस की अवधि | 14 दिन |
| हस्ताक्षरकर्ता (न्यूनतम) | 2 सदस्य |
| अनुच्छेद (हटाने हेतु) | अनुच्छेद 94(c) |
| पीठासीन होने पर रोक | अनुच्छेद 96 |
| मतदान का अधिकार | अध्यक्ष को अधिकार है (प्रथम दृष्टया) |
Sources: PIB & The Hindu


