प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार ने लॉन्च किया NTRAF फ्रेमवर्क

भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (PSA) प्रो. अजय कुमार सूद ने 29 दिसंबर, 2025 को ‘नेशनल टेक्नोलॉजी रेडीनेस असेसमेंट फ्रेमवर्क’ (NTRAF) का अनावरण किया। भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के सहयोग से विकसित यह फ्रेमवर्क भारत के अनुसंधान और विकास (R&D) इकोसिस्टम में पारदर्शिता और सटीकता लाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम माना जा रहा है।

क्या है NTRAF और इसका उद्देश्य?

NTRAF एक एकीकृत और वस्तुनिष्ठ (Objective) पैमाना है, जिसे तकनीकी परियोजनाओं की ‘मैच्योरिटी’ यानी परिपक्वता को मापने के लिए बनाया गया है। अक्सर प्रयोगशालाओं (Labs) में विकसित तकनीकें व्यावसायिक स्तर पर सफल नहीं हो पातीं, जिसे ‘वैली ऑफ डेथ’ कहा जाता है। NTRAF इस अंतर को पाटकर लैब कॉन्सेप्ट से लेकर कमर्शियल डिप्लॉयमेंट तक का स्पष्ट खाका तैयार करेगा।

9 टेक्नोलॉजी रेडीनेस लेवल (TRL): एक नजर में

यह फ्रेमवर्क किसी भी तकनीक को उसकी प्रगति के आधार पर 9 स्तरों में विभाजित करता है:

चरण (Phase)स्तर (TRL Level)विवरण
प्रारंभिक शोधTRL 1-3प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट (प्रायोगिक विचार और सिद्धांत)
विकास चरणTRL 4-6प्रोटोटाइप डेवलपमेंट (प्रायोगिक मॉडल का निर्माण)
व्यावसायिक उपयोगTRL 7-9ऑपरेशनल डिप्लॉयमेंट (बाजार में उतारने के लिए तैयार)

प्रमुख लाभ और रणनीतिक महत्व

  • सटीक फंडिंग: यह फ्रेमवर्क राष्ट्रीय मिशनों के तहत विभिन्न R&D फंडों के लिए एक ‘ऑपरेशनल बैकबोन’ के रूप में काम करेगा, जिससे फंडिंग एजेंसियां सही प्रोजेक्ट पर संसाधनों का निवेश कर सकेंगी।
  • जोखिम में कमी: शुरुआती चरण की तकनीकों के लिए एक सख्त मूल्यांकन पद्धति (Methodology) प्रदान करके, यह निजी निवेशकों के लिए जोखिम को कम करेगा और निवेश को प्रोत्साहित करेगा।
  • आत्मनिर्भर भारत को बल: यह फ्रेमवर्क स्वदेशी तकनीकों के मानकीकरण में मदद करेगा, जिससे भारतीय इनोवेशन को वैश्विक स्तर पर मान्यता मिलेगी।

प्रो. सूद ने इस अवसर पर कहा कि NTRAF न केवल वैज्ञानिकों के लिए बल्कि उद्योगों और नीति निर्माताओं के लिए भी एक मार्गदर्शक का काम करेगा, जिससे भारत की तकनीकी संप्रभुता मजबूत होगी।

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