मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM) का एक और सफल परीक्षण
रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने मैन पोर्टेबल एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल (MPATGM) का एक और सफल परीक्षण कर भारतीय सेना की शक्ति बढ़ाने की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
यहाँ इस परीक्षण और मिसाइल प्रणाली का विस्तृत विवरण दिया गया है:
सफल परीक्षण की मुख्य बातें
- तारीख और स्थान: यह परीक्षण 11 जनवरी को महाराष्ट्र के अहिल्या नगर स्थित केके रेंज में आयोजित किया गया।
- लक्ष्य: मिसाइल ने चलते हुए टारगेट के खिलाफ अपनी ‘टॉप-अटैक’ (Top-Attack) क्षमता का सफलतापूर्वक प्रदर्शन किया।
- विकसितकर्ता: इसे हैदराबाद स्थित DRDO की डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी (DRDL) द्वारा विकसित किया गया है।
- उत्पादन भागीदार: भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) इसके विकास और उत्पादन में भागीदार हैं।
MPATGM की तकनीकी विशेषताएं
यह मिसाइल तीसरी पीढ़ी (3rd Generation) की अत्याधुनिक तकनीक से लैस है, जिसे ‘दागो और भूल जाओ’ (Fire and Forget) श्रेणी में रखा गया है।
- टॉप-अटैक क्षमता: यह मिसाइल दुश्मन के टैंक के सबसे ऊपरी हिस्से (जो सबसे कमजोर होता है) पर हमला करने में सक्षम है।
- सीकर सिस्टम: इसमें इमेजिंग इंफ्रारेड (IIR) होमिंग सीकर लगा है, जो लक्ष्य की सटीक पहचान करता है।
- वॉरहेड: इसमें टैन्डम वॉरहेड (Tandem Warhead) का उपयोग किया गया है, जो आधुनिक विस्फोटक प्रतिरोधी कवच (Explosive Reactive Armour) को भेदने में सक्षम है।
- लॉन्च सिस्टम: इसे तिपाई (Tripod) या सैन्य वाहन पर लगे लॉन्चर से आसानी से दागा जा सकता है।
युद्धक्षेत्र में महत्व
- पोर्टेबिलिटी: ‘मैन पोर्टेबल’ होने के कारण इसे सैनिक युद्ध के मैदान में कहीं भी आसानी से ले जा सकते हैं।
- सटीकता: हाई-परफॉर्मेंस साइटिंग और फायर कंट्रोल सिस्टम के कारण यह कम दृश्यता में भी लक्ष्य पर सटीक वार करती है।
- आत्मनिर्भर भारत: यह पूरी तरह से स्वदेशी रूप से विकसित है, जो रक्षा क्षेत्र में आयात पर निर्भरता कम करती है।


