‘ग्रीन टू गोल्ड’ पहल: हिमाचल प्रदेश में औद्योगिक हेम्प की खेती होगी कानूनी

हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ने राज्य की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने के लिए एक क्रांतिकारी पहल ‘ग्रीन टू गोल्ड’ (Green to Gold) की शुरुआत की है। इस नीति का उद्देश्य ‘इंडस्ट्रियल हेम्प’ (औद्योगिक भांग) की खेती को कानूनी मान्यता प्रदान कर और इसे रेगुलेट करके हिमाचल को बायो-इकोनॉमी के क्षेत्र में एक ग्लोबल लीडर के रूप में स्थापित करना है।


नशे से ‘संसाधन’ की ओर: एक वैज्ञानिक बदलाव

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह रणनीतिक बदलाव पौधे की “मादक पदार्थ” छवि को बदलकर उसे एक “बहुमुखी औद्योगिक संपत्ति” के रूप में पहचान दिलाने के लिए किया गया है।

  • THC की सख्त सीमा: इस नीति का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ यह है कि राज्य में उगाए जाने वाले औद्योगिक हेम्प में टेट्राहाइड्रोकैनाबिनोल (THC) की मात्रा 0.3 प्रतिशत से कम सुनिश्चित की जाएगी।
  • वैज्ञानिक सुरक्षा: 0.3% की यह सीमा पौधे को पूरी तरह से गैर-नशीला बनाती है, जिससे इसका नशीले पदार्थ के रूप में दुरुपयोग करना असंभव होगा, जबकि इसके उच्च गुणवत्ता वाले फाइबर और बीज के गुण सुरक्षित रहेंगे।

आर्थिक क्रांति: ₹2,000 करोड़ का अतिरिक्त राजस्व

राज्य सरकार ने हेम्प को एक ऐसी संपत्ति माना है जो भविष्य के उद्योगों की नींव रख सकती है।

  • राजस्व अनुमान: पूरी तरह लागू होने के बाद, रेगुलेटेड खेती से सालाना 1,000 करोड़ रुपये से लेकर 2,000 करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होने की उम्मीद है।
  • औद्योगिक उपयोग: इसका उपयोग इको-फ्रेंडली टेक्सटाइल (कपड़ा), एडवांस्ड बायोप्लास्टिक, फार्मास्युटिकल और वेलनेस (स्वास्थ्य) उत्पादों के निर्माण में किया जाएगा।
  • बाजार पर नियंत्रण: सरकार का लक्ष्य उस बाजार पर कब्जा करना है, जिस पर वर्तमान में ब्लैक मार्केट और अंतरराष्ट्रीय आयात का दबदबा है।

किसानों के लिए संधारणीय (Sustainable) भविष्य

‘ग्रीन टू गोल्ड’ पहल केवल वित्तीय लाभ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हिमाचल के कृषि समुदाय के लिए एक स्थायी समाधान भी प्रदान करती है।

  • अवैध व्यापार पर लगाम: खेती को वैध और विनियमित करने से अवैध व्यापार पर रोक लगेगी।
  • रोजगार सृजन: फार्मास्युटिकल और कपड़ा उद्योगों में नए अवसर पैदा होंगे, जिससे स्थानीय स्तर पर युवाओं और किसानों की आय में वृद्धि होगी।
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