भारत का खिलौना उद्योग

भारत मण्डपम में 17वें ‘टॉय बिज़ इंटरनेशनल बी2बी एक्सपो’ (Toy Biz International B2B Expo) का आयोजन किया गया। 

भारत का खिलौना उद्योग

भारत का खिलौना उद्योग विनिर्माण, निर्यात और नवाचार (इनोवेशन) में एक जीवंत योगदानकर्ता के रूप में उभर रहा है। अनुकूल जनसांख्यिकी, उपभोक्ताओं की बदलती प्राथमिकताओं और निरंतर नीतिगत समर्थन के बल पर यह क्षेत्र एक नई गति देख रहा है। 

सिंधु घाटी सभ्यता की मिट्टी की गाड़ियों से लेकर आधुनिक शैक्षणिक और इलेक्ट्रॉनिक खिलौनों तक, भारत में खिलौनों की परंपरा लगभग 5,000 साल पुरानी है। यह समृद्ध विरासत देश की रचनात्मकता, सीखने और शिल्प कौशल की स्थायी संस्कृति को दर्शाती है।

ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के तेजी से विस्तार ने उत्पादों की उपलब्धता में सुधार किया है और निर्माताओं के लिए बाजार की पहुंच को बढ़ाया है। मांग के मोर्चे पर, खिलौना बनाने की भारत की समृद्ध परंपरा एक अनूठा लाभ देती है, जहाँ पारंपरिक खिलौने घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों खरीदारों को आकर्षित कर रहे हैं।

वित्तीय वर्ष 2017-18 में खिलौनों (HSN 9503, 9504 और 9505) का कुल निर्यात 152.7 मिलियन अमेरिकी डॉलर था। वर्ष 2025-26 में यह बढ़कर 384.7 मिलियन अमेरिकी डॉलर हो गया, जो 151.9% से अधिक की वृद्धि को दर्शाता है। संयुक्त राज्य अमेरिका (यूएस) प्रमुख निर्यात गंतव्य के रूप में उभरा। अन्य प्रमुख बाजारों में यूनाइटेड किंगडम (यूके), पोलैंड, नीदरलैंड और जर्मनी शामिल रहे।

अनुकूल नीतियां

भारतीय मूल्यों, संस्कृति और इतिहास पर आधारित खिलौनों के डिजाइन को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2020 में ‘खिलौनों के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना’ (National Action Plan for Toys – NAPT) तैयार की गई थी। इस रणनीति का एक बड़ा हिस्सा 2020 में खिलौनों के लिए ‘गुणवत्ता नियंत्रण आदेश’ (Quality Control Order – QCO) लागू करना था। इसके तहत भारतीय सुरक्षा मानकों का पालन करना अनिवार्य कर दिया गया और घरेलू व विदेशी दोनों निर्माताओं के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) प्रमाणन (सर्टिफिकेशन) को अनिवार्य बना दिया गया।

वर्ष 2021 में शुरू किया गया ‘टॉयकैथॉन’ (Toycathon) आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण का समर्थन करता है। 

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा सी-डैक (C-DAC), नोएडा में स्थापित ‘ई-टॉयज लैब’ (e-Toys Lab) का उद्देश्य भारत के स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक खिलौना उद्योग को मजबूत करना है।

कई पारंपरिक भारतीय खिलौनों को जीआई (GI) टैग मिला है, जो उनके अनूठे शिल्प कौशल और क्षेत्रीय पहचान को मान्यता देता है। GI टैग वाले खिलौनों में कर्नाटक के चन्नापटना खिलौने और गुड़िया, मध्य प्रदेश के इंदौर के चमड़े के खिलौने, तमिलनाडु की तंजावुर गुड़िया, तेलंगाना के निर्मल खिलौने और शिल्प, आंध्र प्रदेश के एटिकोप्पाका खिलौने, कर्नाटक के किन्हल खिलौने आदि शामिल हैं।

खिलौना और गुड़िया निर्यात की क्षमता वाले 10 से अधिक जिलों की पहचान की गई है। यह स्थानीय उद्योगों को मजबूत करके, बाजार संपर्क को आसान बनाकर, रोजगार बढ़ाकर और आर्थिक विकास को गति देकर हर जिले की निर्यात क्षमता का लाभ उठाता है।

Source: PIB

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