‘रैपिड सपोर्ट फोर्सेज (RSF), अल-फाशर & अल-अफ़ाड
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने 1 जुलाई, 2026 को ‘सिटी अंडर सीज, चिल्ड्रन अंडर फायर: रैपिड सपोर्ट फोर्सेज क्राइम्स अगेंस्ट ह्यूमैनिटी इन नॉर्थ दारफुर’ नाम से अपनी रिपोर्ट जारी की।
रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि सूडान के नॉर्थ दारफुर राज्य में अल-फाशर (El Fasher) पर कब्जा करने के अभियान के दौरान सूडानी अर्धसैनिक बल ‘रैपिड सपोर्ट फोर्सेज’ (RSF) ने “मानवता के खिलाफ अपराध किए और नृजातीय सफाए (एथनिक क्लींजिंग) को अंजाम दिया”।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, अप्रैल 2023 से सूडान में सूडानी सशस्त्र बलों (SAF) और RSF के बीच एक क्रूर युद्ध चल रहा है, जिसमें हजारों लोग मारे गए हैं और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं।
संयुक्त राष्ट्र ने RSF पर दारफुर के गैर-अरब नृजातीय समूहों के खिलाफ बार-बार नरसंहार करने का आरोप लगाया है।
संयुक्त राष्ट्र की प्रवासन एजेंसी के अनुसार, नॉर्थ दारफुर के उम बारू इलाके के वाडी फंगो गांव से ही एक दिन में 3,500 से अधिक लोग विस्थापित हुए।
पिछले साल, RSF ने सेना के दारफुर स्थित आखिरी गढ़ ‘अल-फाशर’ पर हमला करके कब्जा कर लिया था। संयुक्त राष्ट्र की जांच में कहा गया कि इस हमले में “नरसंहार के लक्षण” दिखाई दिए और इसमें मुख्य रूप से शहर की ज़घावा (Zaghawa) आबादी को निशाना बनाया गया।
सूडान में हाल ही में बनाए गए ‘अल-अफ़ाड‘ (Al-Afadh) कैंप में हजारों विस्थापित सूडानी लोग रह रहे हैं, जो अल-फाशर और नॉर्थ दारफुर के अन्य इलाकों में चल रहे संघर्ष के कारण वहां से भागकर आए हैं।
Sources: TH, Euro News
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