‘स्टेट ऑफ वर्ल्ड फिशरीज एंड एक्वाकल्चर 2026’ रिपोर्ट

खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) की ‘स्टेट ऑफ वर्ल्ड फिशरीज एंड एक्वाकल्चर 2026’ (State of World Fisheries and Aquaculture 2026) रिपोर्ट के अनुसार, साल 2024 में वैश्विक मात्स्यिकी और जलीय कृषि (एक्वाकल्चर) उत्पादन 235 मिलियन टन के एक नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। यह आंकड़ा बढ़ती वैश्विक आबादी का पेट भरने में इस सेक्टर की बढ़ती भूमिका की पुष्टि करता है।

  • जलीय जंतु (Aquatic animal) उत्पादन: जलीय जंतुओं का उत्पादन 195 मिलियन टन तक पहुंच गया है और पिछले कई दशकों से इसमें लगातार वृद्धि हुई है। 1950 के बाद से यह उत्पादन 3.2 प्रतिशत की औसत वार्षिक दर से बढ़ा है।
  • वैश्विक उत्पादन में भारत का स्थान: भारत ने 2024 में दुनिया के कुल जलीय जंतुओं का 9 प्रतिशत उत्पादन किया, जिससे यह चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश बन गया है।
  • अंतर्देशीय जल क्षेत्र (Inland Water Catches): भारत नदियों, झीलों और मीठे पानी के स्रोतों (freshwater systems) से 2.2 मिलियन टन उत्पादन के साथ अंतर्देशीय जल क्षेत्र से मछली पकड़ने में दुनिया में सबसे आगे रहा। इस मामले में भारत, बांग्लादेश के 1.4 मिलियन टन के उत्पादन से आगे रहा।
  • जलीय कृषि (Aquaculture) में हिस्सेदारी: जलीय कृषि के क्षेत्र में पाले जाने वाले जलीय जंतुओं (farmed aquatic animals) के लिए भारत वैश्विक स्तर पर दूसरे स्थान पर रहा, जिसका कुल उत्पादन में 12 प्रतिशत का योगदान है। चीन, इंडोनेशिया, वियतनाम और बांग्लादेश के साथ भारत उस पांच-देशीय ब्लॉक (समूह) का हिस्सा है, जो कुल पाले जाने वाले जलीय जंतुओं का 82 प्रतिशत उत्पादन करता है।

प्रमुख बिंदु: केवल जलीय कृषि (Aquaculture) का उत्पादन ही रिकॉर्ड 142 मिलियन टन तक पहुंच गया, जिसने जलीय जंतु उत्पादन में वृद्धि के मुख्य कारक के रूप में अपनी भूमिका की पुष्टि की। शीर्ष पांच उत्पादक देशों (चीन, इंडोनेशिया, भारत, वियतनाम और बांग्लादेश) की इस उत्पादन में 84 प्रतिशत हिस्सेदारी रही।

सततता (Sustainability) की चुनौती: जैविक रूप से संधारणीय/सतत स्तरों (biologically sustainable levels) के भीतर पकड़े जाने वाले समुद्री मछली के भंडारों (marine fish stocks) की हिस्सेदारी 2023 में घटकर 62.4 प्रतिशत रह गई, जो 2021 में 64.5 प्रतिशत थी।

Source: FAO

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