भारत में जुगनू (Fireflies) की अपनी तरह की पहली चेकलिस्ट

शोधकर्ताओं ने 1881 से 2025 तक के 260 से अधिक वर्षों के बिखरे हुए वैज्ञानिक रिकॉर्ड के आंकड़ों को संकलित करके भारत में जुगनू (Fireflies) की अपनी तरह की पहली चेकलिस्ट तैयार की है।

10 मार्च को ‘जूटैक्सा’ (Zootaxa) जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के मुख्य निष्कर्ष निम्नलिखित हैं:

  • प्रजातियों की संख्या: भारत में 27 वंशों (genera) में 92 प्रजातियों को प्रलेखित किया गया है।
  • स्थानिकता (Endemism): इनमें से 60% से अधिक प्रजातियां स्थानिक (endemic) हैं, यानी वे केवल भारत में ही पाई जाती हैं।
  • क्षेत्रीय वितरण:
    • पश्चिमी घाट: जुगनू की प्रजातियों की सबसे अधिक उपस्थिति (25.33%)।
    • उत्तर-पूर्व: 22.66%।
    • गंगा का मैदान: 17.33%।
    • तटीय और दक्कन प्रायद्वीप: क्रमशः 13.33%।

  • वर्गीकरण: जुगनू वास्तव में बीटल (beetles) हैं, जिन्हें ‘लाइटनिंग बग्स’ (lightning bugs) के रूप में भी जाना जाता है।
  • शारीरिक संरचना: अधिकांश जुगनू पंख वाले होते हैं। यह उन्हें उसी परिवार के अन्य प्रकाश उत्पन्न करने वाले कीटों से अलग करता है, जिन्हें ‘ग्लोवर्म्स’ (glowworms) कहा जाता है।

प्रकाश उत्पन्न करने वाले जीवों को ‘ल्यूमिनेसेंट’ (luminescent) कहा जाता है। जुगनू निम्नलिखित प्रक्रिया के माध्यम से प्रकाश पैदा करते हैं:

  1. उद्देश्य: जुगनू मुख्य रूप से दूसरे जुगनुओं से “बात” करने और साथी (mate) खोजने के लिए अपने प्रकाश का उपयोग करते हैं।
  2. अंग: उनके पेट (abdomen) के नीचे विशेष अंग होते हैं जो ऑक्सीजन ग्रहण करते हैं।
  3. रासायनिक अभिक्रिया: विशेष कोशिकाओं के अंदर, वे ऑक्सीजन को ‘लुसिफेरिन’ (luciferin) नामक पदार्थ के साथ मिलाते हैं।
  4. ठंडा प्रकाश: इस प्रक्रिया से बिना किसी गर्मी के प्रकाश उत्पन्न होता है, जिसे ‘बायोलुमिनेसेंस’ (bioluminescence) कहा जाता है।

Source: TH

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