दुनिया की दूसरी “नेशनल एनवायरनमेंटल स्टैंडर्ड लेबोरेटरी”
भारत ने वैश्विक वैज्ञानिक मानकों के क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करते हुए दो अत्याधुनिक सुविधाओं की स्थापना की है। केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) ने CSIR-नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी (NPL) में दुनिया की दूसरी “नेशनल एनवायरनमेंटल स्टैंडर्ड लेबोरेटरी” और दुनिया की पांचवीं “सोलर सेल कैलिब्रेशन के लिए नेशनल प्राइमरी स्टैंडर्ड फैसिलिटी” का उद्घाटन किया।
1. नेशनल एनवायरनमेंटल स्टैंडर्ड लेबोरेटरी (NESL)
यह प्रयोगशाला भारत के पर्यावरण शासन ढांचे (Environmental Governance) को मजबूत करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।
- महत्व: अब तक भारत वायु प्रदूषण निगरानी प्रणालियों के कैलिब्रेशन के लिए विदेशी मानकों पर निर्भर था। यह सुविधा पारदर्शी, सटीक और भारत-विशिष्ट पर्यावरणीय डेटा सुनिश्चित करेगी।
- लाभ: नियामक निकाय, उद्योग और स्टार्टअप अब भारतीय जलवायु परिस्थितियों के अनुसार अपने उपकरणों का परीक्षण कर सकेंगे। इससे राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) जैसे अभियानों के प्रभावी क्रियान्वयन में मदद मिलेगी।
2. सोलर सेल कैलिब्रेशन के लिए नेशनल प्राइमरी स्टैंडर्ड फैसिलिटी
यह “भविष्य के लिए तैयार सुविधा” भारत को फोटोवोल्टिक (PV) माप मानकों में दुनिया के चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा करती है।
- तकनीकी श्रेष्ठता: जर्मनी के PTB के सहयोग से विकसित यह सुविधा लेजर-आधारित डिफरेंशियल स्पेक्ट्रल रिस्पॉन्सिविटी (L-DSR) प्रणाली का उपयोग करती है। यह संदर्भ सौर सेल कैलिब्रेशन के लिए 0.35% पर विश्व स्तर पर सबसे कम अनिश्चितता (uncertainty) प्राप्त करती है।
- आर्थिक प्रभाव: यह सुविधा विदेशी प्रमाणन एजेंसियों पर निर्भरता को खत्म करेगी, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और सौर क्षेत्र में निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा।


