न्यूक्लिक एसिड टेस्ट (NAT) क्या है?

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात की जांच करने का निर्णय लिया है कि क्या ब्लड बैंकों के लिए बीमारियों की पहचान हेतु न्यूक्लिक एसिड टेस्ट (NAT) आयोजित करना अनिवार्य होना चाहिए। यहाँ इस कानूनी और तकनीकी मामले का विवरण दिया गया है:

NAT (न्यूक्लिक एसिड टेस्ट) क्या है?

  • अत्यधिक संवेदनशील तकनीक: यह एक उन्नत आणविक (molecular) तकनीक है जो रक्त में HIV, हेपेटाइटिस B और हेपेटाइटिस C जैसे वायरस की आनुवंशिक सामग्री (genetic material) का पता लगाती है।
  • विंडो पीरियड में प्रभावी: NAT की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह संक्रमण के बहुत शुरुआती चरणों (विंडो पीरियड) में भी वायरस का पता लगा सकता है, जब पारंपरिक टेस्ट विफल हो सकते हैं।

सुप्रीम कोर्ट में मामला

भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम. पांचोली की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है।

  • लागत-प्रभावशीलता (Cost-effectiveness): अदालत ने याचिकाकर्ता (गैर-सरकारी संगठन ‘सर्वेशम मंगलम फाउंडेशन’) के वकील ए. वेलन से अधिक सामान्यतः उपयोग किए जाने वाले एलिसा (ELISA) टेस्ट की तुलना में NAT की लागत के बारे में सवाल किया है।
  • संवैधानिक तर्क: याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि सुरक्षित रक्त आधान (blood transfusion) का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत ‘जीवन के अधिकार’ का एक मौलिक हिस्सा है।

NAT बनाम ELISA

विशेषताELISA (एलिसा)NAT (नेट)
क्या पता लगाता है?एंटीबॉडी या एंटीजन।वायरस का प्रत्यक्ष DNA/RNA (आनुवंशिक सामग्री)।
विंडो पीरियडअधिक (वायरस का पता चलने में हफ्तों लग सकते हैं)।बहुत कम (संक्रमण के कुछ दिनों बाद ही पता लगा लेता है)।
सटीकताअच्छी, लेकिन शुरुआती संक्रमण छूट सकता है।अत्यधिक सटीक और संवेदनशील।
लागततुलनात्मक रूप से सस्ती।महंगी और परिष्कृत मशीनरी की आवश्यकता।
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