मानसून ब्रेक

दक्षिण-पश्चिम मानसून (SWM), जो जून से सितंबर के बीच भारत की 75 प्रतिशत से अधिक वर्षा का स्रोत है, अपनी ‘ब्रेक’ (विराम) अवधियों के लिए भी जाना जाता है। 10 फरवरी, 2026 को ‘जर्नल ऑफ क्लाइमेट’ में प्रकाशित एक नए शोध पत्र के अनुसार, इन अवधियों की पहले से भविष्यवाणी करना अब संभव हो सकता है।

इस भौगोलिक घटना का मुख्य विवरण यहाँ दिया गया है:

मानसून ब्रेक (Monsoon Break) क्या है?

मानसून के मौसम के दौरान जब देश के अधिकांश हिस्सों में बारिश रुक जाती है और हिमालय की तलहटी (foothills) तथा पूर्वोत्तर भारत में वर्षा बढ़ जाती है, तो इसे ‘मानसून ब्रेक’ कहा जाता है।

  • कारण: भारत के पश्चिम और उत्तर-पश्चिम से बहने वाली शुष्क हवाएँ इन ब्रेक अवधियों का मुख्य कारण बनती हैं।
  • अवधि: यह स्थिति कुछ दिनों से लेकर दो सप्ताह तक बनी रह सकती है।

मानसून ट्रफ (Monsoon Trough) का विस्थापन

मानसून ट्रफ (मानसून गर्त) कम दबाव वाला क्षेत्र है जो पाकिस्तान के ‘हीट लो’ (Heat Low) से लेकर बंगाल की खाड़ी तक फैला होता है। यह मानसून परिसंचरण की एक अर्ध-स्थायी विशेषता है।

  • सामान्य स्थिति: यह भारत-गंगा के मैदानों (Indo-Gangetic plains) के ऊपर स्थित होता है।
  • ब्रेक के दौरान: मानसून ट्रफ अपनी सामान्य स्थिति से खिसक कर हिमालय की तलहटी की ओर चला जाता है। इसके परिणामस्वरूप मध्य भारत में वर्षा में भारी कमी आती है।

आईटीसीजेड (ITCZ) और मानसून ट्रफ का संबंध

इंटर ट्रॉपिकल कन्वर्जेंस ज़ोन (ITCZ) भूमध्य रेखा के पास स्थित एक कम दबाव वाला क्षेत्र है जहाँ व्यापारिक हवाएँ (Trade Winds) आपस में मिलती हैं और हवा ऊपर की ओर उठती है।

  • जुलाई की स्थिति: जुलाई के महीने में, ITCZ उत्तर की ओर खिसक कर $20^\circ\text{N}-25^\circ\text{N}$ अक्षांशों (गंगा के मैदानों) के आसपास स्थित हो जाता है।
  • समानता: इस स्थिति में इसे अक्सर ‘मानसून ट्रफ’ के रूप में भी जाना जाता है।
error: Content is protected !!