हाइपरएंड्रोजेनिज्म क्या है?
चिकित्सा जगत में ‘हाइपरएंड्रोजेनिज्म’ (Hyperandrogenism) एक ऐसी स्थिति के रूप में उभरा है, जो न केवल शारीरिक स्वास्थ्य बल्कि महिलाओं के सामाजिक और मानसिक जीवन पर भी गहरा असर डालती है। यह एक ऐसा विकार है जिसमें शरीर में एंड्रोजन (पुरुष सेक्स हार्मोन), जैसे कि टेस्टोस्टेरोन का स्तर सामान्य से बहुत अधिक हो जाता है।
क्या है हाइपरएंड्रोजेनिज्म और इसके लक्षण?
यद्यपि एंड्रोजन सभी के शरीर में बनते हैं, लेकिन महिलाओं में इनका स्तर कम होता है। जब यह स्तर बढ़ जाता है, तो शरीर में निम्नलिखित लक्षण दिखाई देने लगते हैं:
- शरीर और चेहरे पर अत्यधिक बाल उगना (Hirsutism)।
- गंभीर मुंहासे और त्वचा का तैलीय होना।
- मासिक धर्म (Periods) में अनियमितता।
- प्रजनन क्षमता (Reproductive Health) पर प्रभाव।
प्रमुख कारण: PCOS और एड्रेनल ग्लैंड्स
विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे कई जैविक कारण हो सकते हैं:
- PCOS (पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम): यह सबसे आम कारण है। शोध बताते हैं कि PCOS वाली महिलाओं में इंसुलिन का स्तर अधिक होता है, जो ओवरी (अंडाशय) को अधिक टेस्टोस्टेरोन बनाने के लिए उत्तेजित करता है।
- CAH (जन्मजात एड्रेनल हाइपरप्लासिया): यह आनुवंशिक बीमारियों का एक समूह है जो एड्रेनल ग्लैंड्स (किडनी के ऊपर स्थित ग्रंथियों) को प्रभावित करता है।
- ग्रंथियों की भूमिका: पुरुषों में एंड्रोजन मुख्य रूप से टेस्टिकल्स में बनते हैं, जबकि महिलाओं में ये ओवरी और दोनों लिंगों में एड्रेनल ग्लैंड्स में बनते हैं।
सामाजिक कलंक और खेल जगत में विवाद
हाइपरएंड्रोजेनिज्म केवल एक मेडिकल कंडीशन नहीं रह गई है। समाज में व्याप्त सख्त ‘लैंगिक मानदंडों’ के कारण इसे अक्सर एक कलंक (Stigma) के रूप में देखा जाता है।
विशेषकर खेलों की दुनिया में, इस विकार ने ऐतिहासिक रूप से बड़ा विवाद पैदा किया है। महिला एथलीटों के शरीर में प्राकृतिक रूप से उच्च टेस्टोस्टेरोन स्तर होने पर उनकी ‘महिला होने’ की पहचान पर सवाल उठाए जाते हैं, जो उनके करियर और मानसिक गरिमा को ठेस पहुँचाता है।
Source: TH


