जेमिनिड उल्का बौछार क्या है?
13 दिसंबर की रात को जेमिनिड उल्का बौछार (Geminid meteor shower) ने एक शानदार ब्रह्मांडीय आतिशबाजी का नज़ारा पेश किया, जब सौर मंडल के एस्टेरॉयड (3200) फेथॉन (Phaethon) के टुकड़े पृथ्वी के वायुमंडल से टकराए।
पीक पर प्रति घंटे 120 उल्का
- अपने चरम (पीक) के दौरान, सही परिस्थितियों में प्रति घंटे 120 जेमिनिड उल्का तक देखे जा सकते थे।
- जेमिनिड उल्का बौछारें चमकीले और तेज़ होती हैं, और ये आमतौर पर पीले रंग की होती हैं।
टूटते तारे (Shooting stars) क्यों दिखते हैं?
- उल्का (Meteors) आमतौर पर धूमकेतुओं (comet) के बचे हुए कणों और एस्टेरॉयड (क्षुद्रग्रह) के टुकड़ों से आते हैं।
- जब ये खगोलीय पिंड सूर्य के चारों ओर घूमते हैं, तो वे अपने पीछे धूल भरी पगडंडी छोड़ जाते हैं।
- हर साल, पृथ्वी इन मलबे की पगडंडियों से गुज़रती है।
- जब ये टुकड़े पृथ्वी के वायुमंडल से टकराते हैं, तो वे टूटकर रोशनी की एक चमक में जल जाते हैं, जिससे आसमान में आग की लपटों वाली और रंगीन धारियां बनती हैं, जिन्हें “टूटता तारा” कहा जाता है।
आकार से अधिक चमकदार
- रेत के दाने से बड़े न होने वाले टुकड़े भी शानदार धारियां बना सकते हैं।
- बड़े टुकड़े तो शुक्र ग्रह से भी ज़्यादा चमकीले तीव्र आग के गोले (fireballs) बना सकते हैं।
जेमिनिड का स्रोत: एक अनोखा एस्टेरॉयड
- अधिकांश उल्का बौछारें धूमकेतुओं से उत्पन्न होती हैं, जबकि जेमिनिड उल्का बौछार एक एस्टेरॉयड, (3200) फेथॉन से उत्पन्न होती है।
- एस्टेरॉयड 3200 फेथॉन को सूर्य की एक परिक्रमा पूरी करने में 1.4 साल लगते हैं।
मिथुन तारामंडल (Gemini) से नाम
- रेडिएंट (वह बिंदु जहां से जेमिनिड आते हुए दिखाई देते हैं) मिथुन तारामंडल (Gemini) है, जिसे “जुड़वां” भी कहते हैं।
- इस तारामंडल से ही इस बौछार को इसका नाम मिलता है: जेमिनिड।
- मिथुन तारामंडल सूर्यास्त के बाद पूर्वी से उत्तर-पूर्वी आसमान में उगता है और रात बढ़ने के साथ और ऊपर होता जाता है।


