उपराष्ट्रपति ने किया ‘महामना वांग्मय’ का विमोचन
उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने 25 दिसंबर को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में एक गरिमामय समारोह के दौरान महामना पंडित मदन मोहन मालवीय के संकलित कार्यों की अंतिम श्रृंखला “महामना वांग्मय” का विमोचन किया।
भारत के ‘बौद्धिक डीएनए’ का संकलन
उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में पंडित मालवीय को एक ऐसा दुर्लभ दूरदर्शी बताया, जिनका मानना था कि भारत का भविष्य अपने अतीत को नकारने में नहीं, बल्कि उसे पुनर्जीवित करने में है। उन्होंने कहा:
वांग्मय की मुख्य विशेषताएं
- विशाल संकलन: इस दूसरी और अंतिम श्रृंखला में कुल 12 खंड शामिल हैं।
- व्यापक सामग्री: लगभग 3,500 पृष्ठों में फैले इन खंडों में मालवीय जी के ऐतिहासिक लेखन और प्रभावशाली भाषणों को सहेजा गया है।
- सेतु की भूमिका: उपराष्ट्रपति ने रेखांकित किया कि मालवीय जी ने भारत के प्राचीन मूल्यों और आधुनिक लोकतांत्रिक आकांक्षाओं के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य किया।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
पंडित मदन मोहन मालवीय की कृतियों को संकलित करने की इस परियोजना की शुरुआत महत्वपूर्ण रही है। इन संकलित कृतियों की पहली श्रृंखला का विमोचन वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा किया गया था। अब अंतिम श्रृंखला के विमोचन के साथ ही महामना के विचारों का यह विशाल दस्तावेजीकरण पूर्ण हो गया है।
यह विमोचन न केवल मालवीय जी के योगदान को श्रद्धांजलि देता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए उनके राष्ट्र-निर्माण के दर्शन को सुलभ बनाता है।


