9वें सिद्ध दिवस समारोह

भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने शनिवार को चेन्नई के कलैवनार आरंगम में 9वें सिद्ध दिवस समारोह का भव्य उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने सिद्ध चिकित्सा पद्धति को दुनिया के लिए एक टिकाऊ और निवारक (Preventive) स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली के रूप में प्रस्तुत किया।

“सिद्ध फॉर ग्लोबल हेल्थ”: एक वैश्विक विजन

इस वर्ष के समारोह की थीम “सिद्ध फॉर ग्लोबल हेल्थ” (Siddha for Global Health) रखी गई है। इस कार्यक्रम में देश भर से सिद्ध चिकित्सक, वैज्ञानिक, शिक्षाविद और छात्र बड़ी संख्या में शामिल हुए। उपराष्ट्रपति ने ज़ोर दिया कि पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियाँ जैसे सिद्ध, आयुर्वेद और योग केवल बीते ज़माने की यादें नहीं हैं, बल्कि ये ऐसी जीवित परंपराएं हैं जो आधुनिक समय में भी लाखों लोगों को स्वस्थ जीवन प्रदान कर रही हैं।

ऋषि अगथियार: सिद्ध चिकित्सा के जनक

सिद्ध दिवस का यह आयोजन महान ऋषि अगथियार की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। ऋषि अगथियार को सिद्ध चिकित्सा पद्धति का जनक (Father of Siddha Medicine) माना जाता है। उनके द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतों और जड़ी-बूटियों के ज्ञान ने सदियों से मानवता की सेवा की है।

कार्यक्रम की मुख्य बातें:
  • टिकाऊ हेल्थकेयर: उपराष्ट्रपति ने कहा कि सिद्ध पद्धति पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ स्वास्थ्य समाधान प्रदान करती है।
  • आयुष का महत्व: भारत की पारंपरिक प्रणालियों (Siddha, Ayurveda, Yoga, Unani, Homeopathy) को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने के प्रयासों की सराहना की गई।
  • 6 जनवरी का महत्व: आधिकारिक तौर पर हर साल 6 जनवरी को ‘सिद्ध दिवस’ मनाया जाता है, और इस वर्ष के कार्यक्रमों की श्रृंखला उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

भविष्य की राह: सिद्ध और आधुनिक विज्ञान का संगम

समारोह के दौरान विशेषज्ञों ने इस बात पर चर्चा की कि कैसे सिद्ध चिकित्सा के प्राचीन ज्ञान को आधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान के साथ जोड़कर गंभीर बीमारियों का उपचार खोजा जा सकता है। उपराष्ट्रपति ने युवाओं और वैज्ञानिकों से अपील की कि वे इस पारंपरिक ज्ञान को और अधिक गहराई से समझें और इसे दुनिया के कोने-कोने तक पहुँचाएँ।

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