आर. वैरामुथु को 60वें ज्ञानपीठ पुरस्कार के लिए चुना गया
तमिल गीतकार और लेखक आर. वैरामुथु को भारत के सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान, 60वें ज्ञानपीठ पुरस्कार के लिए चुना गया है। वह 24 वर्षों के अंतराल के बाद यह पुरस्कार प्राप्त करने वाले तीसरे तमिल साहित्यिक व्यक्तित्व हैं। इनसे पहले यह सम्मान दिवंगत लेखकों अकिलन और जयकांतन को मिल चुका है। अकिलन 1975 में ज्ञानपीठ प्राप्त करने वाले पहले तमिल लेखक थे।
श्री वैरामुथु ने 2003 में अपने उपन्यास ‘कल्लिकाट्टू इथिकासम’ (Kallikattu Ithikasam) के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार भी जीता था। गीतकार होने के साथ-साथ वैरामुथु ने कविता संग्रह और उपन्यासों सहित 30 से अधिक पुस्तकें लिखी हैं।
ज्ञानपीठ पुरस्कार
भारतीय ज्ञानपीठ द्वारा प्रदान किया जाने वाला यह पुरस्कार 1961 से प्रतिवर्ष किसी लेखक को उनके “साहित्य में उत्कृष्ट योगदान” के लिए दिया जाता है। इस पुरस्कार के तहत 11 लाख रुपये की नकद राशि, वाग्देवी की प्रतिमा और एक प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाता है। पहला ज्ञानपीठ पुरस्कार 1965 में प्रसिद्ध मलयालम कवि जी. शंकर कुरुप को दिया गया था।
त्वरित तथ्य: ज्ञानपीठ पुरस्कार:
| विवरण | जानकारी |
| 60वां ज्ञानपीठ पुरस्कार (2025/26) | आर. वैरामुथु (तमिल) |
| प्रथम प्राप्तकर्ता | जी. शंकर कुरुप (1965, मलयालम) |
| पुरस्कार की राशि | ₹11 लाख और वाग्देवी की प्रतिमा |
| तमिल साहित्य में अब तक | 3 (अकिलन, जयकांतन, आर. वैरामुथु) |
| प्रदाता संस्था | भारतीय ज्ञानपीठ (संस्थापक: साहु शांति प्रसाद जैन) |


