अमेरिका ने ‘स्ट्रक्चरल एक्सेस कैपेसिटी’ को लेकर भारत सहित कई देशों के खिलाफ ‘धारा 301’ के तहत जांच शुरू की

अमेरिका ने भारत और चीन सहित एक दर्जन से अधिक देशों के खिलाफ ‘धारा 301’ (SECTION 301) के तहत जांच शुरू की है, जिसमें कुछ विनिर्माण क्षेत्रों में “संरचनात्मक अतिरिक्त क्षमता” (structural excess capacity) और अत्यधिक उत्पादन का हवाला दिया गया है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) द्वारा 11 मार्च 2026 को शुरू की गई यह धारा 301 जांच असल में ट्रंप प्रशासन द्वारा अपनी ‘टैरिफ नीति’ को कानूनी रूप से मजबूत करने का एक प्रयास है।

जांच के मुख्य कारण और पृष्ठभूमि

  1. सुप्रीम कोर्ट का निर्णय: फरवरी 2026 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा लगाए गए “पारस्परिक शुल्कों” (Reciprocal Tariffs) को अवैध घोषित कर दिया था। इस कानूनी बाधा को दूर करने के लिए प्रशासन ने अब धारा 301 का सहारा लिया है, जो व्यापारिक जांच के लिए अधिक ठोस कानूनी आधार प्रदान करती है।
  2. संरचनात्मक अतिरिक्त क्षमता (Structural Excess Capacity): अमेरिका का आरोप है कि भारत और चीन जैसे देश अपनी घरेलू मांग से कहीं अधिक उत्पादन कर रहे हैं। USTR के अनुसार, भारत की सोलर मॉड्यूल बनाने की क्षमता उसकी घरेलू मांग से लगभग तीन गुना अधिक है।
  3. व्यापार घाटा: अमेरिका उन देशों को लक्षित कर रहा है जिनके साथ उसका व्यापार घाटा (Trade Deficit) अधिक है। 2025 में भारत के साथ अमेरिका का व्यापार अधिशेष (Surplus) $58 बिलियन था, जो अमेरिकी प्रशासन के लिए चिंता का विषय है।

भारत के प्रभावित क्षेत्र: जांच के दायरे में भारत के वे क्षेत्र हैं जो वैश्विक निर्यात में अग्रणी हैं:

  • टेक्सटाइल (कपड़ा)
  • स्वास्थ्य उत्पाद (Health Products)
  • निर्माण सामग्री (Construction Goods)
  • ऑटोमोटिव (Automotive)
  • सोलर मॉड्यूल, पेट्रोकेमिकल्स और स्टील

महत्वपूर्ण समयसीमा (Timeline): अमेरिकी प्रशासन इस जांच को बहुत तेजी से आगे बढ़ा रहा है ताकि जुलाई में मौजूदा अस्थायी टैरिफ समाप्त होने से पहले नए उपाय लागू किए जा सकें:

  • 17 मार्च 2026: लिखित टिप्पणियों के लिए पोर्टल खुलेगा।
  • 5 मई 2026: सार्वजनिक सुनवाई (Public Hearings) शुरू होगी।
  • जुलाई 2026: जांच के निष्कर्षों के आधार पर नए टैरिफ या प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।
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