गृह मंत्री अमित शाह ने किया बटाद्रवा थान पुनर्विकास परियोजना का उद्घाटन

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने 29 दिसंबर को असम के नगांव जिले में एक ऐतिहासिक कार्यक्रम के दौरान महापुरुष श्रीमंत शंकरदेव की जन्मस्थली, बटाद्रवा थान के पुनर्विकास प्रोजेक्ट का भव्य उद्घाटन किया। इस परियोजना के तहत थान परिसर में एक विशेष ‘आविर्भाव क्षेत्र’ भी विकसित किया गया है, जो इस पवित्र स्थान के आध्यात्मिक महत्व को और बढ़ाएगा।

नव-वैष्णव धर्म का उद्गम स्थल

बटाद्रवा थान केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि उस वैचारिक क्रांति का केंद्र है जिसने पूरे पूर्वोत्तर भारत को एकता के सूत्र में पिरोया। श्रीमंत शंकरदेव ने यहीं से ‘नव-वैष्णव धर्म’ का प्रचार शुरू किया था। उनके द्वारा प्रतिपादित ‘एक शरण नाम धर्म’ परंपरा का मुख्य सिद्धांत भगवान विष्णु (विशेषकर उनके कृष्ण अवतार) की अनन्य भक्ति है।

प्रमुख आध्यात्मिक सिद्धांत

शंकरदेव की शिक्षाएं मुख्य रूप से भागवत-पुराण पर आधारित थीं, साथ ही उन पर भगवद-गीता और वामन-पुराण का गहरा प्रभाव था। उन्होंने भक्ति के नौ रूपों में से दो पर विशेष बल दिया:

  • श्रवण: भगवान के नाम और लीलाओं को सुनना।
  • कीर्तन: भगवान के नाम का सामूहिक या व्यक्तिगत जाप करना।

सांस्कृतिक और संस्थागत योगदान

शंकरदेव ने समाज को संगठित करने के लिए अनूठे संस्थानों की नींव रखी:

  • नामघर और सत्र: ये सांस्कृतिक और धार्मिक केंद्र बने, जहाँ सामूहिक प्रार्थना और चर्चाएं होती हैं। ये संस्थान आज भी असमिया समाज की रीढ़ हैं।
  • अद्वितीय प्रदर्शन कला: उन्होंने सत्रिया नृत्य शैली, बोरगीत, और भावाना जैसी विधाओं को जन्म दिया।

अंकीय नाट: धर्म और मनोरंजन का संगम

शंकरदेव द्वारा शुरू किए गए ‘अंकीय नाट’ (नाटक) धर्म प्रचार का एक सशक्त माध्यम बने। यह स्वदेशी मनोरंजन, धार्मिक दर्शन और शास्त्रीय संस्कृत नाटकों की तकनीकी बारीकियों का एक अनूठा मिश्रण है। इसके माध्यम से उन्होंने जटिल आध्यात्मिक संदेशों को आम जनता तक अत्यंत सरल और कलात्मक तरीके से पहुँचाया।

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