बजट 2026-27: प्रतिभूति लेनदेन कर (STT) में संशोधन

केंद्रीय बजट 2026-27 के तहत, सरकार ने वायदा अनुबंधों (Futures contracts) पर प्रतिभूति लेनदेन कर (Securities Transaction Tax: STT) को 0.02 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.05 प्रतिशत करने का प्रस्ताव दिया है। इसके अतिरिक्त:

  • विकल्प प्रीमियम (Options premium) पर STT को 0.1 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है।
  • विकल्पों के प्रयोग (Exercise of options) पर इसे 0.125 प्रतिशत से बढ़ाकर 0.15 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है।
  • अन्य परिसंपत्ति श्रेणियों (asset classes) में STT की दरें अपरिवर्तित रहेंगी।

इस निर्णय का मुख्य कारण

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के एक अध्ययन का हवाला देते हुए, वित्त मंत्री ने कहा कि F&O (वायदा और विकल्प) खंड के लगभग 90 प्रतिशत प्रतिभागियों को अंततः नुकसान होता है।

प्रमुख अवधारणाएं

  • डेरिवेटिव्स (Derivatives): वायदा और विकल्प ऐसे वित्तीय साधन हैं जो व्यापारियों को बिना स्वामित्व के शेयरों, सूचकांकों या वस्तुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव पर दांव लगाने की अनुमति देते हैं। हालांकि इनका उपयोग हेजिंग (जोखिम प्रबंधन) के लिए किया जाता है, लेकिन उच्च उत्तोलन (Leverage) इन्हें खुदरा निवेशकों के लिए अत्यंत जोखिम भरा बनाता है।
  • STT क्या है?: प्रतिभूति लेनदेन कर (STT) शेयर बाजार में प्रत्येक खरीद और बिक्री लेनदेन पर लगाया जाने वाला कर है। इसे 2004 में कर चोरी (विशेष रूप से पूंजीगत लाभ कर) को रोकने के लिए पेश किया गया था।
  • प्रभाव: यह एक प्रत्यक्ष कर है। यद्यपि इसकी दर छोटी लगती है, लेकिन यह व्यापारिक लागत को सीधे बढ़ा देती है, विशेष रूप से इंट्राडे और एल्गोरिथमिक ट्रेडिंग जैसी उच्च-टर्नओवर वाली रणनीतियों के लिए।
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