करण फ्राइज़ और वृंदावनी सिंथेटिक मवेशी नस्लों का पंजीकरण

भारत के डेयरी क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज करते हुए केंद्र सरकार ने दो नई उच्च क्षमता वाली सिंथेटिक मवेशी नस्लोंकरण फ्राइज़ और वृंदावनी—को आधिकारिक तौर पर पंजीकृत किया है। ये नस्लें 10 महीने की दुग्ध अवधि (lactation period) के दौरान 3,000 किलोग्राम से अधिक दूध उत्पादन करने में सक्षम हैं, जो सामान्य देसी नस्लों (1,000-2,000 किलोग्राम) की तुलना में लगभग दोगुना है।

मुख्य कार्यक्रम और पंजीकरण

केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली में ‘भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय पशु आनुवंशिक संसाधन ब्यूरो’ (ICAR-NBAGR) द्वारा आयोजित एक समारोह में इन नस्लों के पंजीकरण प्रमाण पत्र प्रदान किए।

इस नए पंजीकरण के साथ ही भारत में कुल पंजीकृत पशुधन और मुर्गी नस्लों की संख्या बढ़कर अब 246 हो गई है। मंत्री ने जोर देकर कहा कि पशु नस्ल संरक्षण ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अनिवार्य है।

नई सिंथेटिक नस्लों की विशेषताएं

वैज्ञानिक रूप से विकसित की गई ये दोनों नस्लें भारतीय जलवायु के अनुकूल होने के साथ-साथ भारी मात्रा में दुग्ध उत्पादन के लिए तैयार की गई हैं:

  • करण फ्राइज़ (Karan Fries): * विकास: राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान (NDRI), करनाल (हरियाणा) द्वारा विकसित।
    • संकरण: यह भारतीय थारपारकर गायों और विदेशी होलस्टीन-फ्रेशियन सांडों का क्रॉस है।
    • क्षमता: इसकी औसत दुग्ध क्षमता 3,000 किलो से अधिक है, जबकि कुछ मामलों में यह 3,500-3,800 किलो तक भी पहुंच जाती है।
  • वृंदावनी (Vrindavani):
    • विकास: भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (IVRI), बरेली (उत्तर प्रदेश) द्वारा तैयार।
    • संकरण: यह एक बहु-नस्ल मिश्रण है, जिसमें देसी हरियाणा मवेशियों को तीन विदेशी नस्लों—होलस्टीन-फ्रेशियन, ब्राउन स्विस और जर्सी—के साथ मिलाया गया है।
    • विशेषता: यह उच्च दूध उत्पादन के साथ-साथ उत्तर भारत की गर्मी सहने की क्षमता रखती है।
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