दूसरी ‘भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक’

नई दिल्ली में भारत ने अरब लीग (AL) के 22 सदस्यों के साथ दूसरी ‘भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक’ की मेजबानी की। बहरीन में हुई पहली बैठक के 10 साल बाद यह आयोजन हुआ और यह दिल्ली में आयोजित होने वाली अपनी तरह की पहली बैठक थी।


भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक और दिल्ली घोषणापत्र

यह बैठक ईरान-अमेरिका तनाव, सऊदी अरब और यूएई के बीच बढ़ते मतभेदों और इजरायल-फिलिस्तीन मुद्दे के समाधान के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के नेतृत्व वाले ‘बोर्ड ऑफ पीस’ के नए दृष्टिकोण के बीच हुई।

दिल्ली घोषणापत्र के मुख्य बिंदु:

  • अरब शांति पहल (2002) का समर्थन: घोषणापत्र में 2002 की अरब शांति पहल का पुरजोर समर्थन किया गया है। यह एक ‘शांति के बदले भूमि’ (Land-for-peace) व्यवस्था है, जहाँ अरब देश इजरायल को मान्यता देंगे, बशर्ते इजरायल 1967 से पहले की सीमाओं के आधार पर एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी राज्य को मान्यता दे।
  • शर्म अल-शेख शिखर सम्मेलन (2025): घोषणापत्र 2025 के शर्म अल-शेख शिखर सम्मेलन के परिणामों का भी समर्थन करता है।

आर्थिक और सामरिक संबंध

भारत और अरब देशों के बीच संबंध केवल कूटनीतिक नहीं बल्कि गहरे आर्थिक आधार पर टिके हैं:

क्षेत्रविवरण
कुल व्यापार240 बिलियन डॉलर से अधिक।
हाइड्रोकार्बन व्यापार107 बिलियन डॉलर (कुल व्यापार का लगभग आधा)।
आयात निर्भरताभारत अपनी 95% LPG, 60% LNG और 47% कच्चे तेल की जरूरत अरब देशों से पूरी करता है।
कृषि क्षेत्रभारत 50% से अधिक उर्वरक और संबंधित उत्पाद इन्हीं देशों से मंगाता है।

सामरिक महत्व: भारत का अधिकांश विदेशी व्यापार स्वेज नहर, लाल सागर और अदन की खाड़ी जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों से होकर गुजरता है, जो अरब लीग के प्रभाव क्षेत्र में आते हैं।


अरब लीग (League of Arab States) के बारे में

  • स्थापना: 22 मार्च, 1945 को काहिरा (मिस्र) में ‘अलेक्जेंड्रिया प्रोटोकॉल’ (1944) को अपनाने के बाद।
  • मुख्यालय: काहिरा, मिस्र।
  • प्रकृति: यह मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका के सभी अरब देशों को शामिल करने वाला एक अंतर-सरकारी संगठन है।
  • सदस्यता: वर्तमान में इसमें 22 अरब देश शामिल हैं।
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