भारतीय नौसेना का पहला ट्रेनिंग स्क्वाड्रन (1TS)

भारतीय नौसेना की समुद्री कूटनीति और ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ (Act East Policy) को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, पहला ट्रेनिंग स्क्वाड्रन (1TS) दक्षिण-पूर्व एशिया में अपनी लंबी दूरी की तैनाती के लिए रवाना हो गया है। यह मिशन 110वें इंटीग्रेटेड ऑफिसर्स ट्रेनिंग कोर्स (IOTC) के प्रशिक्षण पाठ्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

तैनाती का मुख्य विवरण:

  • शामिल जहाज: इस मिशन में भारतीय नौसेना के जहाज INS तीर, INS शार्दुल, INS सुजाता और भारतीय तटरक्षक जहाज सारथी शामिल हैं।
  • गंतव्य देश: यह स्क्वाड्रन सिंगापुर, इंडोनेशिया और थाईलैंड की यात्रा करेगा।

प्रमुख उद्देश्य:

  1. व्यावहारिक प्रशिक्षण: ऑफिसर ट्रेनीज़ को वास्तविक ऑपरेशनल वातावरण और विभिन्न समुद्री परिस्थितियों का अनुभव प्रदान करना।
  2. क्रॉस-कल्चरल अनुभव: विदेशी नौसेनाओं के साथ काम करके सांस्कृतिक और पेशेवर समझ को बढ़ाना।
  3. रणनीतिक भागीदारी: दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ भारत के समुद्री संबंधों को और अधिक प्रगाढ़ बनाना।

सहयोगात्मक गतिविधियाँ:

पोर्ट कॉल (बंदरगाहों पर रुकने) के दौरान, स्क्वाड्रन मेजबान देशों की नौसेनाओं के साथ निम्नलिखित गतिविधियों में शामिल होगा:

  • प्रोफेशनल बातचीत: विषय विशेषज्ञों (Subject Matter Experts) के साथ ज्ञान का आदान-प्रदान।
  • इंटरऑपरेबिलिटी: क्रॉस-डेक दौरे और संयुक्त समुद्री साझेदारी अभ्यास, ताकि भविष्य में सामूहिक ऑपरेशनों के लिए आपसी समन्वय बढ़ सके।

रणनीतिक विज़न: ‘SAGAR’ और हिंद महासागर

यह तैनाती एक स्वतंत्र, खुले और समावेशी हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) के लिए भारत के विज़न को दर्शाती है। यह न केवल सैन्य कूटनीति को मजबूत करती है, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करने में भारत की भूमिका को भी रेखांकित करती है।

error: Content is protected !!