द ग्रेट बैकयार्ड बर्ड काउंट’ (GBBC) 2026

फरवरी के मध्य में बालकनियों, परिसरों, आर्द्रभूमि (wetlands) और गाँव के तालाबों से पक्षियों को निहारने का यह अनुष्ठान धीरे-धीरे देश के सबसे विश्वसनीय सिटिजन साइंस (citizen science) अभ्यासों में से एक बन गया है। ‘द ग्रेट बैकयार्ड बर्ड काउंट’ (GBBC), जिसका वैश्विक समन्वय कॉर्नेल लैब ऑफ ऑर्निथोलॉजी और उसके सहयोगियों द्वारा किया जाता है, ने 2013 में दुनिया भर में विस्तार के बाद से भारत की सक्रिय भागीदारी देखी है।

वर्ष 2026 के संस्करण में 1087 प्रजातियों को दर्ज किया गया, जिसमें भारत वैश्विक स्तर पर दूसरे स्थान पर रहा। पश्चिम बंगाल 519 प्रजातियों के साथ राष्ट्रीय तालिका में शीर्ष पर रहा, जो इसके हिमालय की तलहटी, गंगा के मैदानी इलाकों और तटीय आर्द्रभूमि के विविध स्वरूप (mosaic) को दर्शाता है।

1998 में कॉर्नेल लैब ऑफ ऑर्निथोलॉजी और नेशनल ऑडुबोन सोसाइटी द्वारा शुरू किया गया ‘ग्रेट बैकयार्ड बर्ड काउंट’ (GBBC) पहला ऑनलाइन सहभागी-विज्ञान प्रोजेक्ट (जिसे सामुदायिक विज्ञान या सिटिजन साइंस भी कहा जाता है) था, जिसका उद्देश्य जंगली पक्षियों पर डेटा एकत्र करना और परिणामों को वास्तविक समय (near real time) में प्रदर्शित करना था।

Source: TH

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