नेशनल लार्ज सोलर टेलीस्कोप (NLST)

वर्ष 2026–27 के केंद्रीय बजट में सरकार ने सूर्य और ब्रह्मांड की उत्पत्ति के अध्ययन के लिए दो नए दूरबीन (टेलिस्कोप) स्थापित करने को मंज़ूरी दी है। इसके अलावा लद्दाख में मौजूद एक दूरबीन के उन्नयन (अपग्रेडेशन) को भी स्वीकृति दी गई है।

नेशनल लार्ज सोलर टेलीस्कोप (NLST) – सूर्य का अध्ययन

यह टेलीस्कोप भारत की सौर ऊर्जा और अंतरिक्ष मौसम (Space Weather) को समझने की क्षमता को कई गुना बढ़ा देगा।

  • स्थान: मेराक (पेंगोंग त्सो झील के पास)।
  • विशेषता: 2-मीटर का एपर्चर (Aperture)।
  • कार्यप्रणाली: यह स्पेक्ट्रम की दृश्य (Visible) और निकट-अवरक्त (Near-infrared) तरंगदैर्ध्य पर काम करेगा।
  • महत्व: यह कोडाइकनाल और उदयपुर के बाद भारत की तीसरी बड़ी ग्राउंड-आधारित सौर वेधशाला होगी।

नेशनल लार्ज ऑप्टिकल-नियर इंफ्रारेड टेलीस्कोप (NLOT) – ब्रह्मांड की उत्पत्ति

यह परियोजना अपनी तकनीक और आकार के कारण अत्यंत महत्वाकांक्षी है।

  • स्थान: हानले (Hanle)।
  • दर्पण तकनीक: इसमें 13.7-मीटर का प्राथमिक दर्पण होगा, जो 90 छोटे खंडित दर्पणों (Segmented Mirrors) से बना होगा। ये सभी मिलकर एक विशाल दर्पण की तरह प्रकाश एकत्र करेंगे।
  • उद्देश्य: सुदूर आकाशगंगाओं और ब्रह्मांड की उत्पत्ति के शुरुआती संकेतों का अध्ययन करना।

लद्दाख ही क्यों?

लद्दाख, विशेष रूप से हानले, खगोलविदों के लिए स्वर्ग माना जाता है क्योंकि:

साफ रातें: यहाँ साल के अधिकांश समय बादल नहीं होते, जिससे निरंतर अवलोकन संभव है।

ऊँचाई और शुष्कता: समुद्र तल से अत्यधिक ऊँचाई और कम नमी के कारण वायुमंडल बहुत पतला है, जिससे तारों का प्रकाश बिना किसी बाधा के टेलीस्कोप तक पहुँचता है।

डार्क स्काई रिजर्व (Dark Sky Reserve): हानले भारत का पहला डार्क स्काई रिजर्व है। यहाँ कृत्रिम रोशनी (Light Pollution) को नियंत्रित किया जाता है ताकि रात के आकाश की प्राकृतिक अंधकारमय स्थिति बनी रहे।

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