पहली बार केंद्रीय बजट रविवार के दिन पेश किया गया
भारत के राजकोषीय इतिहास (Fiscal History) में यह पहली बार है जब केंद्रीय बजट रविवार के दिन पेश किया गया है। अतीत में, सरकारें फरवरी 1 या फरवरी 28 को छुट्टी होने की स्थिति में तारीखों को आगे-पीछे कर लेती थीं, लेकिन इस बार सरकार ने तारीख बदलने के बजाय परंपरा को बदलने का फैसला किया।
बजट के समय और तारीखों का विकासक्रम
| वर्ष/दौर | महत्वपूर्ण बदलाव | किसके द्वारा |
| 1999 से पहले | बजट शाम 5 बजे पेश होता था (ब्रिटिश औपनिवेशिक विरासत)। | ब्रिटिश सरकार/स्वतंत्र भारत |
| 1999 | समय बदलकर सुबह 11 बजे किया गया। | यशवंत सिन्हा (अटल बिहारी वाजपेयी सरकार) |
| 1999 (तारीख) | 28 फरवरी रविवार होने के कारण बजट एक दिन पहले शनिवार (27 फरवरी) को पेश हुआ। | यशवंत सिन्हा |
| 2017 | बजट की तारीख को स्थाई रूप से 1 फरवरी तय कर दिया गया। | अरुण जेटली (नरेंद्र मोदी सरकार) |
| 2026 | इतिहास में पहली बार रविवार (1 फरवरी) को बजट पेश हुआ। | निर्मला सीतारमण (नरेंद्र मोदी सरकार) |
दो प्रमुख बदलाव जिन्होंने इतिहास बदला
1. शाम 5 बजे से सुबह 11 बजे का सफर (1999):
ब्रिटिश काल में बजट शाम 5 बजे पेश किया जाता था ताकि उस समय ब्रिटेन में काम के घंटे शुरू हो सकें। 1999 में यशवंत सिन्हा ने इसे बदलकर सुबह 11 बजे किया, जो भारतीय प्राथमिकताओं को ऊपर रखने का एक बड़ा प्रतीक बना।
2. 2017 का सुधार और 1 फरवरी की तारीख:
2017 से पहले बजट फरवरी के अंत में पेश होता था। सुधार के बाद इसे 1 फरवरी कर दिया गया ताकि:
- संसद और मंत्रालयों को चर्चा के लिए पर्याप्त समय मिले।
- 1 अप्रैल से शुरू होने वाले नए वित्त वर्ष से पहले सभी प्रस्ताव लागू किए जा सकें।


