बॉन्ड यील्ड में उछाल

2 फरवरी (2026) को बॉन्ड मार्केट (Bond Market) में तीखी प्रतिक्रिया देखी गई, क्योंकि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा केंद्रीय बजट में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए रिकॉर्ड सकल ऋण योजना (Gross Borrowing Plan) की घोषणा के एक दिन बाद 10-वर्षीय बेंचमार्क सरकारी बॉन्ड की यील्ड एक साल से अधिक के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई।

बॉन्ड मार्केट की वर्तमान स्थिति

  • यील्ड में उछाल: 10-वर्षीय बॉन्ड की यील्ड 8 आधार अंकों (bps) की वृद्धि के साथ 6.78% पर पहुंच गई। यह 17 जनवरी, 2025 के बाद का उच्चतम स्तर है।
  • कारण: सरकार द्वारा बाजार से भारी मात्रा में कर्ज लेने की योजना ने निवेशकों को सतर्क कर दिया है, जिससे बॉन्ड की कीमतों में गिरावट और यील्ड में वृद्धि हुई है।

बढ़ती बॉन्ड यील्ड का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

यील्ड में वृद्धि का अर्थ है पूरी वित्तीय प्रणाली में वित्तपोषण लागत (funding costs) का बढ़ना। इसके प्रभाव निम्नलिखित हैं:

  1. सरकारी उधारी की लागत: यील्ड बढ़ने पर सरकार को निवेशकों को आकर्षित करने के लिए अधिक रिटर्न देना पड़ता है, जिससे सरकार का ब्याज खर्च बढ़ जाता है।
  2. बैंकिंग प्रणाली पर दबाव: सरकारी बॉन्ड यील्ड बढ़ने से बैंकिंग प्रणाली में ब्याज दरों पर दबाव पड़ता है, जिससे कर्ज (Loans) महंगे हो सकते हैं और जमा (Deposits) की दरों में भी बदलाव आता है।
  3. बचत का स्थानांतरण: यदि सरकारी बॉन्ड और बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के बीच रिटर्न का अंतर (yield gap) बढ़ता है, तो निवेशक बैंकों से पैसा निकालकर सरकारी बॉन्ड में लगा सकते हैं।

बॉन्ड की कीमतों और यील्ड के बीच संबंध

लेख में निवेश के एक महत्वपूर्ण सिद्धांत को समझाया गया है: बॉन्ड की कीमतें और यील्ड विपरीत दिशा में चलते हैं।

  • विपरीत संबंध: जब बॉन्ड की यील्ड बढ़ती है, तो द्वितीयक बाजार (secondary market) में मौजूदा बॉन्ड की कीमतें गिर जाती हैं।
  • पूँजीगत हानि (Capital Loss): यदि निवेशक परिपक्वता (maturity) से पहले बॉन्ड बेचते हैं, तो गिरती कीमतों के कारण उन्हें घाटा उठाना पड़ सकता है।
  • निवेशक धारणा: यील्ड में वृद्धि इस बात का संकेत है कि निवेशक भविष्य में चिपचिपी मुद्रास्फीति (Sticky Inflation) और उच्च ब्याज दरों की उम्मीद कर रहे हैं।
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