‘सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया’ (SHANTI) बिल, 2025
15 दिसंबर, 2025 को लोकसभा में पेश किया गया ‘सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया’ (SHANTI) बिल, भारत के ऊर्जा परिदृश्य को बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह विधेयक एटॉमिक एनर्जी एक्ट, 1962 और सिविल लायबिलिटी फॉर न्यूक्लियर डैमेज एक्ट, 2010 का स्थान लेगा।
निजी क्षेत्र की भागीदारी को प्रोत्साहन
इस बिल का प्राथमिक उद्देश्य भारतीय और विदेशी निजी कंपनियों के लिए परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के दरवाजे खोलना है। अब तक यह क्षेत्र मुख्य रूप से सरकारी नियंत्रण में था, लेकिन अब निजी निवेश के माध्यम से परमाणु बिजली उत्पादन को गति दी जाएगी।
लायबिलिटी (दायित्व) संरचना में बदलाव
विधेयक में परमाणु दुर्घटना की स्थिति में ‘नो-फॉल्ट’ सिद्धांत (No-fault principle) को बरकरार रखा गया है, लेकिन मुआवजे की राशि में महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं:
| मानक | सिविल लायबिलिटी एक्ट, 2010 | SHANTI बिल, 2025 |
| लायबिलिटी की सीमा | अधिकतम ₹1,500 करोड़ (10 MW से अधिक क्षमता के लिए) | टियर-आधारित: ₹100 करोड़ से ₹3,000 करोड़ तक (क्षमता के आधार पर) |
| राइट टू रिकोर्स (Right to Recourse) | ऑपरेटर आपूर्तिकर्ता (Supplier) से हर्जाना वसूल सकता था। | समाप्त: अब पूरा दायित्व ऑपरेटर का होगा। |
| क्षेत्रीय कवरेज | केवल भारत की सीमा के भीतर हुए नुकसान तक सीमित। | भारत के बाहर (अन्य देशों) में हुए नुकसान को भी कवर करेगा (शर्तों के साथ)। |
‘राइट टू रिकोर्स’ का अंत और उसका महत्व
पुराने कानून (2010) के तहत, अगर किसी दुर्घटना का कारण खराब उपकरण होता था, तो ऑपरेटर सप्लायर से पैसा वसूल सकता था। नए बिल ने इस प्रावधान को हटा दिया है। इसका उद्देश्य विदेशी और घरेलू सप्लायरों के मन से कानूनी मुकदमेबाजी का डर हटाना है, ताकि वे भारत में परमाणु तकनीक की आपूर्ति के लिए प्रोत्साहित हों।
नियामक ढांचे का सुदृढ़ीकरण (AERB)
विधेयक एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड (AERB) को वैधानिक (Statutory) मान्यता प्रदान करता है। इससे बोर्ड को रेडिएशन और परमाणु ऊर्जा के सुरक्षित उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए अधिक स्वायत्तता और कानूनी शक्ति मिलेगी।
विवाद निपटान प्रणाली
न्यायिक प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए बिल में द्वि-स्तरीय (Two-tier) अपील प्रणाली का प्रस्ताव है:
- एटॉमिक एनर्जी रिड्रेसल एडवाइजरी काउंसिल: केंद्र सरकार या AERB के फैसलों के खिलाफ पहली अपील यहाँ की जाएगी।
- अपीलेट ट्रिब्यूनल फॉर इलेक्ट्रिसिटी (APTEL): काउंसिल के फैसलों को APTEL के समक्ष चुनौती दी जा सकेगी।


