सुप्रीम कोर्ट ने ब्लड बैंकों में न्यूक्लिक एसिड टेस्ट अनिवार्य करने की याचिका खारिज की।

सुप्रीम कोर्ट ने 13 मार्च को एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए रक्त आधान (Blood Transfusion) से पहले न्यूक्लिक एसिड टेस्ट (NAT) को अनिवार्य करने की याचिका को खारिज कर दिया है।

  • वित्तीय सीमाएँ: मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि राज्यों की अपनी वित्तीय सीमाएँ होती हैं। कोर्ट सरकार को “अत्यधिक महंगे” परीक्षणों को अनिवार्य करने का निर्देश नहीं दे सकता।
  • विशेषज्ञता का अभाव: न्यायाधीशों ने स्पष्ट किया कि वे “चिकित्सा विज्ञान को समझने का ढोंग” नहीं कर सकते और ऐसे तकनीकी मामलों में न्यायिक आदेश पारित करना उचित नहीं है।
  • लागत बनाम लाभ: कोर्ट ने याचिकाकर्ता से NAT की लागत और वर्तमान में उपयोग किए जा रहे ELISA (Enzyme-Linked Immunosorbent Assay) परीक्षण के बीच तुलनात्मक विवरण माँगा था।

NAT तकनीक क्या है?

न्यूक्लिक एसिड टेस्टिंग (NAT) एक अत्यधिक संवेदनशील आणविक तकनीक (Molecular Technique) है जिसका उपयोग रक्त के नमूनों में वायरस, बैक्टीरिया के संक्रमण के आनुवंशिक पदार्थ (DNA या RNA) का पता लगाने के लिए किया जाता है।

  • शीघ्र पहचान: यह पारंपरिक एंटीबॉडी परीक्षणों की तुलना में संक्रमण का बहुत पहले पता लगा सकता है।
  • विंडो पीरियड में कमी: यह उस “विंडो पीरियड” (संक्रमण और परीक्षण में दिखने के बीच का समय) को कम कर देता है जिसमें वायरस, बैक्टीरिया के संक्रमण का पता लगाना मुश्किल होता है।
  • लक्षित रोग: यह मुख्य रूप से HIV, हेपेटाइटिस B और हेपेटाइटिस C जैसे रोगों की पहचान के लिए उपयोग किया जाता है।

NAT बनाम ELISA (तुलनात्मक चार्ट)

विशेषताELISA (वर्तमान मानक)NAT (प्रस्तावित)
सिद्धांतएंटीबॉडी/एंटीजन का पता लगाता है।आनुवंशिक पदार्थ (DNA/RNA) का पता लगाता है।
संवेदनशीलतामध्यम (विंडो पीरियड लंबा होता है)।अत्यंत उच्च (विंडो पीरियड बहुत छोटा)।
लागतसस्ती और व्यापक रूप से उपलब्ध।अत्यधिक महंगी।
उपयोगअधिकांश सरकारी ब्लड बैंकों में।वर्तमान में सीमित या निजी केंद्रों तक सीमित।
error: Content is protected !!