होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व
ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच लगातार बढ़ते संघर्ष ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के माध्यम से होने वाली तेल और गैस की आपूर्ति को गंभीर रूप से बाधित कर दिया है। यह जलमार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण धमनी माना जाता है।
इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान में सैन्य हमले किए जाने के बाद, तेहरान ने उन खाड़ी देशों को निशाना बनाकर जवाबी कार्रवाई की है जहाँ अमेरिकी सैन्य हित मौजूद हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य, जो दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल पारगमन ‘चोकपॉइंट’ (अवरोध बिंदु) है, ईरान और ओमान के बीच एक संकरा जलमार्ग है जो फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। इसके उत्तर में ईरान और दक्षिण में ओमान तथा संयुक्त अरब अमीरात (UAE) स्थित हैं।
वैश्विक और भारत पर प्रभाव:
- वैश्विक स्तर पर: यह जलमार्ग दुनिया के कुल तरल पेट्रोलियम उपभोग और वैश्विक एलएनजी (LNG) व्यापार के लगभग पांचवें हिस्से को संभालता है।
- भारत का आयात: भारत के कुल तेल आयात का लगभग आधा हिस्सा—यानी करीब 25 से 27 लाख बैरल प्रतिदिन (bpd)—इसी जलडमरूमध्य से होकर आता है। इसमें इराक, सऊदी अरब, यूएई और कुवैत जैसे देशों से होने वाली आपूर्ति शामिल है।
- निर्भरता: भारत कच्चे तेल का दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है और इसकी आयात निर्भरता 88% से अधिक है।
एलपीजी और एलएनजी की चुनौती:
भारत की गैस खपत का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा होता है, जिसमें से लगभग 60% एलएनजी (LNG) आयात इसी जलमार्ग से गुजरता है। कच्चे तेल के विपरीत, जिसके लिए वैश्विक ‘स्पॉट मार्केट’ में पर्याप्त उपलब्धता रहती है, एलपीजी और एलएनजी की उपलब्धता काफी कम है। यदि होर्मुज जलमार्ग लंबे समय तक बंद रहता है, तो भारत के लिए इन दोनों ईंधनों की आपूर्ति की स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है क्योंकि इनके लिए कोई ढांचागत सुरक्षा भंडार (structural buffers) मौजूद नहीं है।


