स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 (FoF 2.0)

केंद्रीय कैबिनेट ने देश के तेजी से बढ़ते स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए वेंचर कैपिटल (जोखिम पूंजी) जुटाने हेतु ₹10,000 करोड़ के कोष के साथ स्टार्टअप इंडिया फंड ऑफ फंड्स 2.0 (FoF 2.0) की स्थापना को मंजूरी दे दी है।

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा ‘स्टार्टअप इंडिया’ पहल के तहत शुरू किया गया FoF 2.0, भारत को दुनिया के अग्रणी स्टार्टअप हब के रूप में स्थापित करने के पिछले एक दशक के प्रयासों को आगे बढ़ाता है।

स्टार्टअप इंडिया: एक नज़र में विकास

  • विस्तार: 2016 में स्टार्टअप इंडिया की शुरुआत के समय देश में 500 से भी कम स्टार्टअप थे, जो अब बढ़कर 2 लाख से अधिक हो गए हैं (DPIIT द्वारा मान्यता प्राप्त)।
  • रिकॉर्ड: वर्ष 2025 में अब तक के सबसे अधिक वार्षिक स्टार्टअप पंजीकरण दर्ज किए गए हैं।
  • FFS 1.0 की सफलता: 2016 में लॉन्च किए गए पहले ‘फंड ऑफ फंड्स’ (FFS 1.0) का पूरा ₹10,000 करोड़ का कॉर्पस 145 अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIFs) को आवंटित किया जा चुका है।

FoF 2.0 की मुख्य विशेषताएं और प्राथमिकताएं

स्टार्टअप इंडिया FoF 2.0 एक लक्षित (Targeted) और खंडित (Segmented) फंडिंग दृष्टिकोण अपनाता है:

  1. डीप टेक और मैन्युफैक्चरिंग: यह उन ‘डीप टेक’ और तकनीक-आधारित नवाचारी मैन्युफैक्चरिंग उपक्रमों को प्राथमिकता देगा जिन्हें लंबी अवधि की पूंजी (Patient Capital) की आवश्यकता होती है।
  2. शुरुआती चरण (Early-growth stage) को सहारा: शुरुआती वर्षों में पूंजी की कमी के कारण विफल होने वाले स्टार्टअप्स को बचाने के लिए यह फंड विकास के शुरुआती चरण में सहायता प्रदान करेगा।
  3. भौगोलिक विस्तार: इसका उद्देश्य महानगरों से परे निवेश का विस्तार करना है ताकि पूरे देश में नवाचार फले-फूले।
  4. रणनीतिक क्षेत्र: यह उन प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में उच्च-जोखिम वाली पूंजी की कमी को दूर करेगा जो ‘आत्मनिर्भरता’ और आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण हैं।
  5. घरेलू आधार की मजबूती: यह भारत के घरेलू वेंचर कैपिटल आधार, विशेष रूप से छोटे फंडों को मजबूत करेगा।
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