भारत की पहली CBDC-आधारित सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) का शुभारंभ

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने 15 फरवरी को गांधीनगर, गुजरात में भारत की पहली सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDC) आधारित सार्वजनिक वितरण प्रणाली का शुभारंभ किया।

मुख्य आकर्षण: ‘अन्नपूर्णा’ मशीन

इस अवसर पर गृह मंत्री ने ‘अन्नपूर्णा’ मशीन का भी उद्घाटन किया।

  • क्षमता: यह मशीन मात्र 35 सेकंड में 25 किलो अनाज वितरित कर सकती है।
  • लाभ: यह अनाज की सटीक मात्रा सुनिश्चित करती है और गुणवत्ता की जांच में सुधार लाती है।

CBDC-आधारित PDS कैसे काम करता है?

यह प्रणाली राशन वितरण में भ्रष्टाचार और बिचौलियों को खत्म करने के लिए डिज़ाइन की गई है। इसकी कार्यप्रणाली ‘डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर’ (DBT) के समान है, जिसने कल्याणकारी योजनाओं में लीकेज (रिसाव) को रोका है।

  1. डिजिटल कूपन (e₹): भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के माध्यम से डिजिटल कूपन उत्पन्न किए जाएंगे, जिन्हें लाभार्थियों के खातों में प्रोग्रामेबल डिजिटल करेंसी (e₹) के रूप में क्रेडिट किया जाएगा।
  2. रिडेम्पशन (भुनाना): लाभार्थी उचित दर की दुकानों (FPS) पर CBDC कूपन या वाउचर कोड का उपयोग करके अपने हिस्से का अनाज प्राप्त कर सकते हैं।
  3. तकनीकी समाधान: यह प्रणाली बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण और e-POS संचालन से जुड़ी समस्याओं का समाधान करती है, जिससे सुरक्षित और रीयल-टाइम लेनदेन सुनिश्चित होता है।

कार्यान्वयन और लाभ

  • पायलट प्रोजेक्ट: यह पहल भारत सरकार, RBI और गुजरात सरकार के सहयोग से अहमदाबाद, आणंद, वलसाड और सूरत जिलों में शुरू की गई है।
  • डिजिटल वॉलेट: लाभार्थियों के डिजिटल वॉलेट में ‘प्रोग्रामेबल डिजिटल रुपया’ होगा, जिससे QR कोड या कूपन कोड के माध्यम से निर्बाध लेनदेन संभव होगा।
  • पारदर्शिता: बार-बार बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण की आवश्यकता खत्म होगी, लेनदेन की दक्षता बढ़ेगी और रीयल-टाइम डिजिटल ट्रेल के माध्यम से जवाबदेही सुनिश्चित होगी।
  • डीलर लाभ: उचित दर दुकान (FPS) के डीलरों को भी उनका मार्जिन रीयल-टाइम आधार पर प्राप्त होगा।

खाद्य सुरक्षा का डिजिटल परिवर्तन

पिछले कुछ वर्षों में, खाद्य और सार्वजनिक वितरण विभाग ने कई महत्वपूर्ण सुधार किए हैं:

  • ONORC: ‘वन नेशन वन राशन कार्ड’ के तहत राष्ट्रव्यापी पोर्टेबिलिटी।
  • आधार प्रमाणीकरण: e-POS उपकरणों के माध्यम से वास्तविक समय में लेनदेन की कैप्चरिंग।
  • अन्न चक्र और अन्न सहायता: डिजिटल आपूर्ति श्रृंखला अनुकूलन और सुदृढ़ शिकायत निवारण प्रणाली।

निष्कर्ष: CBDC-आधारित डिजिटल खाद्य मुद्रा पायलट प्रोजेक्ट, PDS आर्किटेक्चर में एक संप्रभु डिजिटल भुगतान लेयर को जोड़कर सुधारों के अगले चरण का प्रतिनिधित्व करता है।

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