भारत में नदी और एस्चुएरीन डॉल्फिन के दूसरे राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण की शुरुआत
भारत के राष्ट्रीय जलीय जीव के संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, प्रोजेक्ट डॉल्फिन के तहत डॉल्फिन आबादी का दूसरा रेंजवाइड एस्टिमेशन (अनुमान) 17 जनवरी को उत्तर प्रदेश के बिजनौर से शुरू किया गया। यह सर्वेक्षण केंद्र सरकार की उस प्रतिबद्धता का हिस्सा है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मार्च 2025 में गिर में आयोजित नेशनल बोर्ड फॉर वाइल्डलाइफ की बैठक के दौरान रेखांकित किया था।
सर्वेक्षण की रूपरेखा और नेतृत्व
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने वाइल्डलाइफ वीक 2025 के दौरान देहरादून में इस दूसरे पैन-इंडिया अनुमान और इसके वैज्ञानिक प्रोटोकॉल को लॉन्च किया था।
- समन्वय: भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII), देहरादून।
- प्रमुख भागीदार: राज्य वन विभाग, WWF इंडिया, आरण्यक और वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (WTI)।
- विशेष विस्तार: इस बार पहली बार, गंगा और सिंधु डॉल्फिन के साथ-साथ सुंदरबन और ओडिशा में पाई जाने वाली इरावदी डॉल्फिन को भी गणना में शामिल किया जाएगा।
पिछले सर्वेक्षण (2021-2023) के मुख्य आंकड़े
पिछले देशव्यापी सर्वे में कुल 6,327 नदी डॉल्फिन दर्ज की गई थीं:
- प्रमुख नदियाँ: गंगा, यमुना, चंबल, गंडक, घाघरा, कोसी, महानंदा और ब्रह्मपुत्र।
- सिंधु डॉल्फिन: ब्यास नदी में एक छोटी आबादी की पहचान की गई।
- शीर्ष राज्य: उत्तर प्रदेश और बिहार में सबसे अधिक डॉल्फिन देखी गईं, जिसके बाद पश्चिम बंगाल और असम का स्थान रहा।
‘प्रोजेक्ट डॉल्फिन’ और संरक्षण के प्रयास
15 अगस्त 2020 को लॉन्च हुए इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य आवास संरक्षण, वैज्ञानिक अनुसंधान और सामुदायिक जागरूकता के माध्यम से समुद्री और नदी की डॉल्फिन को बचाना है।
- वैज्ञानिक उपलब्धि: 18 दिसंबर 2024 को असम में पहली बार गंगा डॉल्फिन को सैटेलाइट-टैग किया गया।
- कानूनी सुरक्षा: इन्हें वन्य जीवन (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-1 में रखा गया है।
- लुप्तप्राय श्रेणी: मंत्रालय ने इन्हें 22 गंभीर रूप से लुप्तप्राय प्रजातियों की सूची में शामिल कर वित्तीय सहायता प्रदान की है।
- राष्ट्रीय डॉल्फिन दिवस: 2022 से प्रतिवर्ष 5 अक्टूबर को मनाया जाता है।
गंगा डॉल्फिन की अनूठी जैविक विशेषताएं
डॉल्फिन कछुओं और शार्क की तरह दुनिया के सबसे पुराने जीवों में से एक हैं। गंगा डॉल्फिन की कुछ विशेषताएं उन्हें अद्वितीय बनाती हैं:
- इकोलोकेशन (Echolocation): ये आमतौर पर अंधी होती हैं। शिकार के लिए ये अल्ट्रासोनिक आवाज निकालती हैं, जो शिकार से टकराकर वापस आती है, जिससे इनके दिमाग में शिकार की एक छवि बन जाती है।
- शारीरिक संरचना: इनका शरीर मजबूत और लचीला होता है, जिसमें बड़े फ्लिपर्स और पीठ पर एक तिकोना फिन होता है।
- सुंदरबन का महत्व: सुंदरबन डेल्टा दुनिया का एकमात्र ऐसा पारिस्थितिक क्षेत्र है जहाँ गंगा डॉल्फिन और इरावदी डॉल्फिन दोनों एक साथ पाई जाती हैं।


