राजा रानी झील में प्राचीन जलवायु के प्रमाण

लखनऊ के बीरबल साहनी इंस्टीट्यूट ऑफ पैलियोसाइंसेज (BSIP) के वैज्ञानिकों ने छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले की राजा रानी झील से प्राप्त साक्ष्यों के आधार पर भारत के प्राचीन जलवायु इतिहास का पुनर्निर्माण किया है।


1. मुख्य निष्कर्ष और अनुसंधान विधि

  • क्षेत्र: कोर मॉनसून ज़ोन (CMZ), छत्तीसगढ़।
  • अवधि: लगभग 1,060 से 1,725 ईस्वी के बीच के भारी मानसून और पर्यावरणीय बदलाव।
  • पैलिनोलॉजी (Palynology): वैज्ञानिकों ने झील की तलछट (Sediment core) से प्राचीन पराग कणों का विश्लेषण किया। ये कण पिछली वनस्पतियों और जलवायु स्थितियों के ‘टाइम कैप्सूल’ की तरह कार्य करते हैं।

2. भारतीय ग्रीष्मकालीन मॉनसून (ISM) की महत्ता

  • CMZ का महत्व: कोर मॉनसून ज़ोन भारत की 89-90% बारिश के लिए जिम्मेदार है। यह क्षेत्र ISM के उतार-चढ़ाव के प्रति अत्यंत संवेदनशील है।
  • असामान्य बारिश: शोध से पता चला है कि मध्यकालीन भारत में वर्तमान की तुलना में कहीं अधिक तेज़ मानसून का अनुभव किया गया था।

3. ‘मेघालयन युग’ और 4.2 ka घटना

  • 4.2 ka घटना: लगभग 4,200 साल पहले एक वैश्विक महा-सूखा (Megadrought) पड़ा था, जिसने कई सभ्यताओं और कृषि आधारित समाजों को नष्ट कर दिया।
  • मेघालयन युग (Meghalayan Age): यह होलोसीन काल का सबसे नया हिस्सा है, जो 4,200 साल पहले से लेकर आज तक चल रहा है।
  • मावमलुह गुफा (Meghalaya): यहाँ के स्टैलेग्माइट (Stalagmites) के नमूनों में इस जलवायु परिवर्तन के सटीक रासायनिक संकेत मिलते हैं, जो दुनिया भर के भूवैज्ञानिकों के लिए एक बेंचमार्क है।

4. भूवैज्ञानिक समय सारणी (Holocene Sub-divisions)

इंटरनेशनल कमीशन ऑन स्ट्रैटिग्राफी (ICS) के अनुसार होलोसीन (पिछले 11,700 वर्ष) को विभाजित किया गया है:

  1. ग्रीनलैंडियन (Greenlandian): हिमयुग की समाप्ति के बाद की शुरुआत।
  2. नॉर्थग्रिपियन (Northgrippian): मध्य होलोसीन।
  3. मेघालयन (Meghalayan): 4,200 वर्ष पहले से वर्तमान तक।
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