चीन के वैज्ञानिकों ने परमाणु संलयन की दिशा में एक बड़ी बाधा को पार किया

चीन के वैज्ञानिकों ने परमाणु संलयन (Nuclear Fusion) की दिशा में एक बड़ी बाधा को पार कर लिया है। हेफ़ेई स्थित EAST (Experimental Advanced Superconducting Tokamak) रिएक्टर के शोधकर्ताओं ने प्लाज्मा डेंसिटी की एक दशकों पुरानी सीमा को सफलतापूर्वक पार कर लिया है, जिससे ‘बर्निंग प्लाज्मा’ (Burning Plasma) प्राप्त करने का सपना अब हकीकत के करीब पहुँच गया है।

क्या है यह बड़ी उपलब्धि?

वैज्ञानिकों ने रिएक्टर के भीतर प्लाज्मा डेंसिटी को एक विशेष सीमा से 65% आगे तक बढ़ाया और इसे स्थिर बनाए रखने में सफलता प्राप्त की।

  • बर्निंग प्लाज्मा: यह वह अवस्था है जहाँ फ्यूजन रिएक्शन (संलयन प्रक्रिया) इतनी ऊर्जा पैदा करती है कि वह बिना किसी बाहरी सहायता के अपने आप चलने लगती है।

फ्यूजन पावर: सूरज की ऊर्जा की नकल

परमाणु संलयन वही प्रक्रिया है जो सूर्य को ऊर्जा देती है। इसमें हाइड्रोजन के परमाणु इतनी तेज गति से टकराते हैं कि वे आपस में जुड़कर (फ्यूज होकर) हीलियम बनाते हैं और भारी मात्रा में ऊर्जा मुक्त करते हैं।

  • चुनौती: यह प्रक्रिया केवल 100,000,000º C से अधिक तापमान पर ही संभव है।
  • ट्रिपल प्रोडक्ट: संलयन की सफलता को तीन मापदंडों से मापा जाता है: डेंसिटी × तापमान × कन्फाइनमेंट टाइम। इग्निशन (Ignition) तक पहुँचने के लिए इन तीनों का उच्च होना अनिवार्य है।

ग्रीनवाल्ड डेंसिटी लिमिट की बाधा

दशकों से, टोकामक (Tokamak) — डोनट के आकार के चुंबकीय बर्तन — एक बड़ी समस्या का सामना कर रहे थे जिसे ‘ग्रीनवाल्ड डेंसिटी लिमिट’ कहा जाता है।

  • जोखिम: यदि डेंसिटी इस सीमा से अधिक होती, तो प्लाज्मा अस्थिर होकर ढह जाता था, जिससे रिएक्टर को गंभीर नुकसान हो सकता था।
  • सफलता: EAST रिएक्टर, जो पहले इस सीमा के 80-100% पर काम करता था, अब इस सीमा के 1.3 से 1.65 गुना अधिक डेंसिटी पर स्थिर प्लाज्मा बनाने में सफल रहा है।

[Image showing a chart of the Greenwald Density Limit in a Tokamak reactor]

कैसे मिली यह सफलता? (दो विशेष तकनीकें)

चीन की टीम ने दो प्रमुख नवाचारों का उपयोग किया:

  1. ECRH हीटिंग: रिएक्टर शुरू करते समय ‘इलेक्ट्रॉन साइक्लोट्रॉन रेजोनेंस हीटिंग’ का उपयोग किया गया।
  2. ईंधन प्रबंधन: टीम ने चैंबर में पहले ड्यूटेरियम गैस के साथ शुरुआत की और जैसे-जैसे तापमान बढ़ा, उसमें हाइड्रोजन ईंधन डाला गया।
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