सऊदी अरब ने यमन के मुकल्ला पोर्ट पर की बमबारी

यमन के गृहयुद्ध में एक नया और गंभीर मोड़ आ गया है। 30 दिसंबर को सऊदी अरब ने यमन के प्रमुख पोर्ट शहर मुकल्ला (Mukalla) पर हवाई हमले किए। यह बमबारी उस समय हुई जब कथित तौर पर संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से हथियारों की एक बड़ी खेप इस बंदरगाह पर पहुंची थी। इस घटना ने खाड़ी के दो प्रमुख सहयोगियों, सऊदी अरब और UAE के बीच बढ़ते मतभेदों को सतह पर ला दिया है।

सऊदी अरब की कड़ी चेतावनी

बमबारी के तुरंत बाद, सऊदी अरब ने अबू धाबी को एक सख्त कूटनीतिक चेतावनी जारी की है। सऊदी नेतृत्व ने UAE को 24 घंटे के भीतर यमन के उन क्षेत्रों से अपनी सेना और उपस्थिति हटाने का निर्देश दिया है।

सऊदी अरब की इस आक्रामक कार्रवाई के जवाब में, UAE ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा है कि वह यमन में तैनात अपनी बाकी बची सेना को वापस बुला रहा है। हालांकि, अभी तक इन हवाई हमलों में किसी के हताहत होने की पुष्टि नहीं हुई है।

गठबंधन में दरार की वजह: ‘अलगाववादी ताकतें’

तनाव की मुख्य वजह यमन के भीतर सक्रिय सदर्न ट्रांजिशनल काउंसिल (STC) और उसकी बढ़ती गतिविधियां हैं:

  • अमीरात का समर्थन: STC एक अलगाववादी समूह है जिसे UAE का मजबूत समर्थन प्राप्त है।
  • मुकल्ला पर कब्जा: मुकल्ला यमन के हद्रामौत प्रांत में स्थित है, जिस पर हाल के दिनों में STC ने अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया था।
  • सऊदी का पक्ष: सऊदी अरब के साथ गठबंधन वाले अन्य गुटों ने मांग की है कि अमीराती सेना तुरंत हट जाए, क्योंकि वे STC की बढ़ती ताकत को अपनी सत्ता के लिए खतरा मानते हैं।

मुकल्ला का रणनीतिक महत्व

मुकल्ला शहर का यमन की राजनीति और युद्ध में विशेष स्थान है:

  1. लोकेशन: यह रणनीतिक पोर्ट शहर अदन (Aden) से लगभग 480 किलोमीटर (300 मील) उत्तर-पूर्व में स्थित है।
  2. सत्ता केंद्र: 2014 में हूती विद्रोहियों द्वारा राजधानी सना पर कब्जे के बाद से अदन और इसके आसपास के इलाके हूती विरोधी ताकतों के मुख्य गढ़ रहे हैं।
  3. आर्थिक गलियारा: हद्रामौत प्रांत का हिस्सा होने के नाते यह क्षेत्र व्यापार और तेल संसाधनों के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
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