सुप्रीम कोर्ट ने POCSO एक्ट में ‘रोमियो-जूलियट’ क्लॉज़ जोड़ने का सुझाव दिया
किशोरों के बीच सहमति से बनने वाले रोमांटिक रिश्तों को आपराधिक मुकदमों से बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक महत्वपूर्ण सुझाव दिया है। शीर्ष अदालत ने प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस (POCSO) एक्ट में एक ‘रोमियो-जूलियट’ क्लॉज़ शामिल करने की आवश्यकता पर बल दिया है।
क्यों पड़ी इस क्लॉज़ की जरूरत?
कोर्ट ने चिंता व्यक्त की है कि वर्तमान में इस कानून का इस्तेमाल परिवारों द्वारा “बदला लेने” के हथियार के रूप में किया जा रहा है।
- दुरुपयोग: अक्सर जब किसी लड़की का परिवार लड़के के साथ उसके रिश्ते पर आपत्ति जताता है, तो वे POCSO के तहत मामला दर्ज करा देते हैं।
- प्रभाव: इसके परिणामस्वरूप, समान उम्र के किशोर लड़के लंबे समय तक जेलों में बंद रहते हैं, जिससे उनका भविष्य प्रभावित होता है।
क्या है ‘रोमियो-जूलियट’ क्लॉज़?
यह एक कानूनी छूट (Legal Exception) है जो निम्नलिखित स्थितियों में सुरक्षा प्रदान करती है:
- सहमति: जब दो किशोरों के बीच यौन गतिविधि आपसी सहमति से हुई हो।
- समान आयु: जब दोनों की उम्र लगभग एक जैसी हो (Age Proximity)।
- उद्देश्य: ऐसे मामलों को ‘वैधानिक बलात्कार’ (Statutory Rape) के मुकदमों से बचाना जहाँ कोई वास्तविक यौन शोषण या अपराध की मंशा न हो।
POCSO एक्ट: एक नज़र में
प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेस (POCSO) एक्ट, 2012 भारत का एक सशक्त कानून है जो बच्चों को यौन अपराधों से बचाने के लिए बनाया गया है।
| मुख्य बिंदु | विवरण |
| परिभाषा | 18 वर्ष से कम आयु का कोई भी व्यक्ति ‘बच्चा’ माना जाता है। |
| सजा | अपराध की गंभीरता के आधार पर कड़ी सजा का प्रावधान। |
| 2019 संशोधन | बच्चों के खिलाफ गंभीर अपराधों के लिए मृत्युदंड (Death Penalty) का प्रावधान जोड़ा गया। |


