अरलम तितली अभयारण्य
केरल सरकार ने कन्नूर जिले में स्थित अरलम वन्यजीव अभयारण्य का नाम बदलकर ‘अरलम तितली अभयारण्य’ करने की आधिकारिक घोषणा की है। इस ऐतिहासिक फैसले के साथ ही यह केरल का पहला समर्पित तितली अभयारण्य बन गया है।
बदलाव का कानूनी आधार
- अधिसूचना: यह निर्णय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 18(1) के तहत ‘SRO नंबर 1407/2025’ के माध्यम से अधिसूचित किया गया है।
- इतिहास: इस नए नामकरण ने वर्ष 1984 की उस मूल अधिसूचना में संशोधन किया है, जिसने अरालम फार्म क्षेत्र को पहली बार वन्यजीव अभयारण्य घोषित किया था।
- कारण: राज्य वन्यजीव बोर्ड ने इस क्षेत्र की असाधारण तितली विविधता और उनकी भारी संख्या को देखते हुए इस नाम परिवर्तन की सिफारिश की थी।
अरलम की भौगोलिक और पारिस्थितिक विशेषताएं
अरलम केवल तितलियों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी जैव विविधता के लिए भी प्रसिद्ध है:
- विस्तार: यह कन्नूर जिले में 55 वर्ग किमी में फैला हुआ है।
- वनस्पति: यहाँ मुख्य रूप से सदाबहार (Evergreen) और अर्ध-सदाबहार वन पाए जाते हैं।
- सीमाएँ: इसकी सीमाएँ कर्नाटक के ब्रह्मगिरी वन्यजीव अभयारण्य, केरल के कोटियूर वन्यजीव अभयारण्य और उत्तरी वायनाड वन प्रभाग से लगती हैं।
अरलम का आकर्षण: प्रवास और मड-पडलिंग
यह अभयारण्य दो विशेष घटनाओं के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है:
- तितलियों का प्रवास: यहाँ बड़े पैमाने पर तितलियों का मौसमी प्रवास देखा जाता है।
- मड-पडलिंग: यहाँ तितलियाँ गीली मिट्टी से खनिज और पोषक तत्व सोखने के लिए झुंड में इकट्ठा होती हैं, जिसे ‘मड-पडलिंग’ कहा जाता है।
दुर्लभ वन्यजीव और जल स्रोत
तितलियों के अलावा, अरालम शेड्यूल 1 के तहत संरक्षित स्लेंडर लोरिस (Slender Loris) का एक विशेष निवास स्थान है। इस क्षेत्र की जीवन रेखा चींकन्नी नदी (Cheenkanni River) है, जो ब्रह्मगिरी पर्वतमाला से निकलती है और अभयारण्य के घने जंगलों को सींचती है।


