RBI-वित्तीय समावेशन सूचकांक (FI-Index)
भारतीय रिजर्व बैंक का वित्तीय समावेशन सूचकांक (RBI’s Financial Inclusion Index: FI-Index) मार्च 2024 के 64.2 से बढ़कर मार्च 2025 में 67.0 हो गया है। यह वृद्धि देश के बैंकिंग, निवेश, बीमा, डाक और पेंशन क्षेत्रों में हो रहे व्यापक सुधारों को दर्शाती है।
क्या है RBI-FI-Index?
यह सूचकांक 2021 में लॉन्च किया गया था, जिसका उद्देश्य पूरे देश में वित्तीय सेवाओं की पहुंच और उपयोग की सटीक तस्वीर पेश करना है। यह मुख्य रूप से तीन महत्वपूर्ण आयामों (Dimensions) पर आधारित है:
- पहुंच (Access): वित्तीय सेवाओं की उपलब्धता।
- उपयोग (Usage): लोग इन सेवाओं का कितना उपयोग कर रहे हैं।
- गुणवत्ता (Quality): सेवाओं का स्तर और उपभोक्ता संरक्षण।
प्रमुख रणनीतियाँ और रोडमैप
भारत की इस प्रगति के पीछे दो प्रमुख राष्ट्रीय रणनीतियाँ काम कर रही हैं:
- राष्ट्रीय वित्तीय समावेशन रणनीति 2019-2024 (NSFI): वित्तीय सेवाओं के विस्तार के लिए एक समन्वित दृष्टिकोण।
- राष्ट्रीय वित्तीय शिक्षा रणनीति 2020-2025 (NSFE): वित्तीय साक्षरता और उपभोक्ता संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए।
विश्व बैंक की ग्लोबल फिन्डेक्स (Global Findex) रिपोर्ट 2025
विश्व बैंक ने भी भारत के प्रयासों की सराहना की है। ग्लोबल फिन्डेक्स डेटाबेस 2025 के अनुसार:
- भारत में बैंक खाता रखने वाले वयस्कों की संख्या 2011 के बाद से बढ़कर 89 प्रतिशत तक पहुँच गई है।
- सक्रिय खातों (Active Accounts) के उपयोग में भी भारत ने दुनिया के अन्य देशों की तुलना में उल्लेखनीय सुधार किया है।


