ओपन मार्केट ऑपरेशंस के तहत RBI द्वारा G-Secs की खरीद
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध के बीच, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 9 मार्च को ₹50,000 करोड़ की सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) की ओपन मार्केट ऑपरेशंस (OMO-खुले बाजार परिचालन) के माध्यम से खरीद नीलामी आयोजित की।
मुख्य विवरण:
- परिपक्वता अवधि (Maturity): ये प्रतिभूतियाँ अलग-अलग अवधि की हैं, जिनमें 21 जुलाई, 2030 (6.01% दर) से लेकर 19 जून, 2053 (7.30% दर) तक की परिपक्वता शामिल है।
- उद्देश्य: इस खरीद का मुख्य उद्देश्य अग्रिम कर (advance tax) के भुगतान के कारण बाजार से बाहर जाने वाली नकदी की भरपाई करना है, ताकि बैंकों के पास ऋण देने के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध रहे।
ओपन मार्केट ऑपरेशंस (OMO) क्या हैं?
OMO वे बाजार संचालन हैं जो RBI द्वारा सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री या खरीद के माध्यम से किए जाते हैं। इसका मुख्य लक्ष्य बाजार में रुपये की तरलता (Liquidity) की स्थिति को स्थायी आधार पर समायोजित करना है।
यह कैसे काम करता है?
| स्थिति | RBI की कार्रवाई | परिणाम |
| बाजार में अतिरिक्त नकदी (Excess Liquidity) | प्रतिभूतियों की बिक्री (Sale) | बाजार से नकदी सोख ली जाती है। |
| बाजार में नकदी की कमी (Tight Liquidity) | प्रतिभूतियों की खरीद (Purchase) | बाजार में नई नकदी डाली जाती है। |
इस कदम का महत्व:
- तरलता प्रबंधन: जब बाजार में नकदी की स्थिति “टाइट” (कम) होती है, तो RBI प्रतिभूतियों को खरीदता है, जिससे अर्थव्यवस्था में पैसा वापस आता है।
- स्थिरता: पश्चिम एशिया में युद्ध जैसे वैश्विक संकटों के समय बाजार में घबराहट को कम करने और बैंकिंग प्रणाली को सुचारू रखने के लिए ऐसे कदम उठाए जाते हैं।
- ऋण उपलब्धता: ओएमओ खरीद सुनिश्चित करती है कि बैंकों के पास तरलता की कमी न हो, जिससे आम लोगों और उद्योगों के लिए ऋण (Loans) मिलना आसान बना रहता है।
Sources: The Hindu & RBI


