RBI ने बैंकों के लाभांश भुगतान को लाभ के 75% तक सीमित किया
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों के लिए विवेकपूर्ण मानदंडों (Prudential Norms) का एक नया सेट पेश किया है, जो अधिकांश बैंकों के लिए लाभांश भुगतान (Dividend Payout) को कर पश्चात लाभ (PAT) के अधिकतम 75 प्रतिशत तक सीमित करता है। इसका उद्देश्य लाभ के वितरण को पूंजीगत मजबूती, लाभप्रदता और नियामक अनुपालन के साथ अधिक बारीकी से जोड़ना है।
केंद्रीय बैंक ने 10 मार्च को ‘भारतीय रिजर्व बैंक (वाणिज्यिक बैंक – लाभांश की घोषणा और लाभ के प्रेषण पर विवेकपूर्ण मानदंड) निर्देश, 2026’ जारी किए। ये मानदंड वित्तीय वर्ष (FY) 2026-27 से लागू होंगे और 28 नवंबर 2025 को जारी किए गए पिछले निर्देशों का स्थान लेंगे।
मुख्य दिशा-निर्देश
- लाभांश की सीमा: भारत में निगमित बैंक, जो पात्रता मानदंडों को पूरा करते हैं, निर्धारित सीमाओं तक लाभांश घोषित कर सकेंगे, लेकिन कुल मिलाकर यह संबंधित अवधि के कर पश्चात लाभ (PAT) के 75 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए।
- सकारात्मक लाभ की अनिवार्यता: भारत में निगमित बैंकों के पास उस अवधि के लिए एक सकारात्मक ‘समायोजित कर पश्चात लाभ’ (Adjusted PAT) होना चाहिए, जिसके लिए लाभांश प्रस्तावित है।
- विदेशी बैंक: भारत में शाखा मोड में काम करने वाले विदेशी बैंकों के पास उस अवधि के लिए सकारात्मक PAT होना चाहिए, जिसके लिए लाभ उनके प्रधान कार्यालय (Head Office) को प्रेषित किया जाना है।
विभिन्न बैंक श्रेणियों के लिए सीमाएं
नए विवेकपूर्ण मानदंडों को समान शर्तों के साथ बैंकों की अन्य श्रेणियों तक भी विस्तारित किया गया है:
| बैंक श्रेणी | लाभांश भुगतान की अधिकतम सीमा (PAT का %) |
| वाणिज्यिक बैंक (Commercial Banks) | 75% |
| लघु वित्त बैंक (Small Finance Banks) | 75% |
| पेमेंट बैंक (Payment Banks) | 75% |
| क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक (RRBs) | 80% |
| स्थानीय क्षेत्र बैंक (Local Area Banks) | 80% |
Source: DD


