रातापानी टाइगर रिज़र्व का नाम अब डॉ. विष्णु वाकणकर के नाम पर होगा
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने राज्य की सांस्कृतिक पहचान और वन्यजीव संरक्षण को एक सूत्र में पिरोते हुए एक ऐतिहासिक घोषणा की है। प्रदेश के नवनिर्मित रातापानी टाइगर रिज़र्व का नाम अब प्रसिद्ध पुरातत्वविद् और पद्म श्री पुरस्कार विजेता डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर के नाम पर रखा जाएगा। यह निर्णय न केवल एक महान विद्वान को श्रद्धांजलि है, बल्कि उस क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व को भी रेखांकित करता है।
भीमबेटका और डॉ. वाकणकर का गहरा नाता
डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर वही व्यक्ति थे जिन्होंने 1957 में विश्व प्रसिद्ध भीमबेटका रॉक शेल्टर की खोज की थी।
- यूनेस्को विश्व धरोहर: भीमबेटका, जो भोपाल से लगभग 40 किमी दूर स्थित है, रातापानी वन्यजीव अभयारण्य की सीमाओं के भीतर ही आता है।
- प्रागैतिहासिक पेंटिंग: यहाँ हजारों साल पुरानी दुनिया की कुछ सबसे प्राचीन शैल चित्रकलाएँ मौजूद हैं, जो मानव सभ्यता के क्रमिक विकास की गवाह हैं।
रातापानी: मध्य प्रदेश का 8वां और भारत का 57वां टाइगर रिज़र्व
दिसंबर 2024 में आधिकारिक तौर पर टाइगर रिज़र्व घोषित होने के बाद, रातापानी अब एक नए नाम के साथ संरक्षण के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाएगा।
रिज़र्व की प्रमुख विशेषताएं:
- क्षेत्रफल: यह 1,271 वर्ग किमी से अधिक के विशाल क्षेत्र में फैला हुआ है।
- जैव विविधता: यहाँ लगभग 90 बाघों के साथ-साथ तेंदुए, स्लॉथ भालू और वनस्पतियों की दुर्लभ प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
- महत्व: यह मध्य प्रदेश का 8वां और भारत का 57वां टाइगर रिज़र्व है।


