‘प्रोजेक्ट ग्रेट इंडियन बस्टर्ड कैप्टिव ब्रीडिंग प्रोग्राम’ चौथे वर्ष में प्रवेश किया

पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने 13 मार्च को जानकारी दी कि प्रोजेक्ट ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) अपने कैप्टिव ब्रीडिंग (बंदी प्रजनन) कार्यक्रम के चौथे वर्ष में प्रवेश कर चुका है। इस सप्ताह दो नए चूजों के जन्म के साथ, बंदी अवस्था में पक्षियों की कुल संख्या 70 हो गई है। उन्होंने बताया कि ये चूजे राजस्थान के संरक्षण प्रजनन केंद्र (Conservation Breeding Centre) में पैदा हुए हैं।

उन्होंने आगे कहा कि इस वर्ष के कुछ कैप्टिव-ब्रेड चूजों को ‘सॉफ्ट रिलीज’ (soft release) के माध्यम से जंगलों में छोड़ा जाएगा, जो इस परियोजना के लिए एक नई शुरुआत होगी।

प्रोजेक्ट ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (GIB) के मुख्य बिंदु:

  • शुरुआत: क्रिटिकली एंडेंजर्ड ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (Ardeotis nigriceps), जिसे स्थानीय रूप से ‘गोडावण’ कहा जाता है, के संरक्षण के लिए राजस्थान के मुख्यमंत्री द्वारा 5 जून 2013 को यह महत्वाकांक्षी कार्यक्रम शुरू किया गया था।
  • प्रजनन: ये मुख्य रूप से मानसून के मौसम में प्रजनन करते हैं। मादा पक्षी खुले मैदान में केवल एक अंडा देती है। चूजों के पोषण और देखभाल में नर की कोई भूमिका नहीं होती; चूजे अगले प्रजनन सीजन तक अपनी माँ के साथ रहते हैं।
  • वितरण: वर्तमान में इनकी आबादी मुख्य रूप से राजस्थान और गुजरात तक सीमित है। महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में भी इनकी कम संख्या पाई जाती है।
  • विशेषताएँ: ग्रेट इंडियन बस्टर्ड उड़ सकता है, लेकिन अपने भारी शरीर (15-18 किलोग्राम) के कारण यह बहुत तेज या फुर्तीला उड़ान भरने वाला पक्षी नहीं है। यह राजस्थान का राज्य पक्षी है।
  • पारिस्थितिक महत्व: घास के मैदानों की एक प्रमुख प्रजाति होने के कारण, इन्हें घास के मैदानों के पारिस्थितिकी तंत्र (Grassland Ecosystem) के स्वास्थ्य का संकेतक माना जाता है। दुर्भाग्य से, इन घास के मैदानों की उपेक्षा की गई है और इन्हें ‘बंजर भूमि’ माना जाता रहा है।
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